VIDEO : हारे के सहारे आजा तेरा दास पुकारे …

धीरेंद्र् जोशी/उदयपुर. क्यूं भूल गए श्याम मुझे पागल समझकर..., आओ कन्हैया आओ मुरारी, तेरे दर पर आया सुदामा भिखारी..., हारे के सहारे आजा तेरा दास पुकारे आजा... सहित अन्य भजनों की प्रस्तुतियों की पंक्तियों के बीच खाटू वाले श्याम बाबा की मनोहारी छवि के दर्शन कर भक्त मंत्रमुग्ध होते रहे। सुंदर रत्नों से शृंगारित बाबा के दर्शन करने वाले भक्त उनके सामने से हटने का नाम नहीं ले रहे थे। कई भक्त बाबा के दर्शन करने के लिए बार-बार कतार में लगे और बाबा के दर्शन किए, फिर भी इन भक्तों का मन नहीं भरा।
यह नजारा शनिवार की रात को फतह स्कूल प्रांगण में दिखाई दिया। रात होने के साथ ही यहां श्याम भक्तों के आने का क्रम शुरू हो गया। बाबा के दर्शन के साथ ही श्रद्धालु भौर होने तक मधुर भजनों की स्वर लहरियों में खोए रहे। यह भजन संध्या श्री श्याम भक्त मण्डल ट्रस्ट (रजि.) उदयपुर ओर से हुई। इसमें उदयपुर के साथ ही आसपास के जिलों के भक्तों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

भजन संध्या की शुरुआत इंदौर के विपुल गैंदर की गणपति वंदना से हुई। उन्होंने लो आ गया श्याम अब तो मैं शरण तेरी...., दानी होकर क्यों चुप बैठा यह कैसी दातारी रे श्याम बाबा तेरे भगत है दुखारी रे..., तू है मेरा एक सांवरा हम हारे हारे तुम हारे के सहारे भजनों की प्रस्तुति देकर भक्तों को भक्तिरस से सराबोर किया। रामावतार अग्रवाल ने सजने का है शौकीन कोई कसर ना रह जाए, ऐसा कर दो शृंगार सब देखते रह जाए..., खाटू जो पहुंचा पहली बार मन को लुभाया यह दरबार..., कीर्तन की है रात बाबा आज थाणे आणो है... आदि भजनों की लय छेड़ी तो बाबा के जयकारों से पांडाल गूंज उठा। आशीष सुल्तानिया मोनू ने जब ऐ री सखी मंगल गावो री... गाया तो पूरा पांडाल झूम उठा। उन्होंने मीराबाई पर चर्चित भजन एकली खड़ी रे मीरां बाई एकली खड़ी सुनाया तो महिलाएं खुद को नाचने से नहीं रोक पाई। गायक सौरभ शर्मा ने देखू जिधर, उधर ही मेरे श्याम का नजारा..., हारे के सहारे आजा तेरा दास पुकारे आजा... भजनों की प्रस्तुति दी। पटना की रेशमी शर्मा ने वो कौन है जिसने हमको दी पहचान है, कोई और नहीं वह खाटू वाला श्याम है..., तेरा नाम लेते लेते मेरी उम्र बीत जावे..., कन्हैया मेरी लाज रखना भजनों की प्रस्तुति दी। कोलकोता के संजू शर्मा ने कब आएगा मेरे सांवरिया सांवली सूरत पर दिल..., किस्मत वालों को मिलता है बाबा... आदि अनेक भजनों की प्रस्तुति दी। उदयपुर के अनिल आनंद शर्मा ने मेरा बाबा दौड़ा आता है..., खोल खजाने बांट रहा है सबको बारी-बारी..., इक आस तुम्हारी है, एक विश्वास तुम्हारा है..., केमिता राठौड़ ने जद से थारे से हुई है मुलाकात सांवरा..., श्याम तेरे भगतो को तेरा ही सहारा है... और मैं तो ओढ़ ली चुनरियां श्याम नाम री... की प्रस्तुति दी। कोलकाता के मंच संचालक अनील शर्मा ने मंच संचालन किया।

बाबा को धराया छप्पन भोग

बाबा को तुलसी पंचामृत माखन मिश्री पंचमेवा खीर चूरमे सहित 56 तरह के व्यंजन धराए गए। जागरण से पहले भक्त मंडल के सदस्य अपने सिर पर रखकर छप्पन भोग थालियों पर सजाकर लाए और बाबा को भोग धराया। इसके साथ ही ज्योत प्रज्ज्वलित की गई। इसके बाद भक्तों को प्रसाद वितरण शुरू किया गया जो सुबह तक चलता रहा।

रात भर चला भंडारा

भजन संध्या में आने वाले भक्तों को शुद्ध देशी घी से बनी 'बूंदीÓ प्रसाद स्वरूप वितरित की गई। इसके अलावा भक्तों के लिए रात पर भंडारा भी चलता रहा जिसमें भोजन प्रसाद, जल, चाय व मठरी की व्यवस्था निशुल्क प्रदान की गई। भंडारे में कई भक्तों ने अपनी ओर से सेवा दी।

चरणपादुका सेवा

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के श्री राधा माधव चरण पादुका समिति के कार्यकर्ताओं ने फतह स्कूल मैदान में अपनी सेवा दी। उदयपुर के ही सच खण्ड दरबार के सुखचैन सिंह कण्डा के नेतृत्व में भी लगातार 15वीं बार नि:शुल्क चरणपादुका सेवा दी गई।

एेसे सजा दरबार

खाटू वाले श्याम बाबा का ५१ फीट ऊंचा दरबार शानदार दिखाई दे रहा था। बाबा के दरबार में ऊंट और मयूर की पिछवई के साथ ही बाबा के एक ओर जहां बालाजी की प्रतिमा थी वहीं दूसरी और नंदी रथ पर सवार भोलेनाथ की खड़ी प्रतिमा स्थापित थी। बीच में खाटू वाले श्याम का शीष हीरे-मोती स्वर्ण रजत के आभूषणों और मुकुट से सजा हुआ था। 500 रंग-बिरंगी पुष्पमालाओं एवं सुगन्धित पुष्पों से बाबा की झांकी सजी थी। बाबा के सम्मुख विविध व्यंजन भोग धराए गए थे वहीं यहां दर्शन करने आने वाला हर भक्त हवन में आहुतियां दे रहा था।

थकने के बाद भी नहीं भरा जी

बाबा की भजन संध्या में श्रद्धालु मग्न होकर झूमने लगे। भक्तों का उत्साह देख गायकों ने भी एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए। भजनों पर लगातार नृत्य करने से भक्तों का शरीर जरूर थका लेकिन उनका जी भौर तक नहीं भरा।

ढपली और चंग की धुन पर श्रद्धलु मंत्रमुग्ध

जयपुर के मनीश घीवाला ने अपनी मधुर आवाज से भजन गाने के साथ ही ढपली और चंग की धुन पर श्रद्धलुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अलग-अलग धुन बजाकर पंडाल में कभी होली तो कभी अन्य पर्वों का माहौल बना दिया।