video: हद हो गई: सच को छिपाने के लिए महाराणा भूपाल चिकित्सालय बोल रहा है सफेद झूठ

उदयपुर . आरएनटी मेडिकल कॉलेज के बाल चिकित्सालय में एक दिन में नौ बच्चों की मौत के मामले में विभागीय अधिकारी अब पर्दा डालने में जुटे हैं। तीन जांच कमेटियां बनाई गई, जिसमें से दो ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जिसका खुलासा नहीं किया। एमबी चिकित्सालय अधीक्षक की ओर से गठित जांच कमेटी ने अस्पताल को क्लीन चिट दे दी।

अधीक्षक का कहना है कि उस दिन एक बच्चे की मौत हुई थी जबकि पत्रिका टीम के पास मौजूद दस्तावेज के अनुसार 28 जनवरी की रात से लेकर 29 जनवरी की सुबह तक नौ बच्चों की मौत हुई। इससे पहले 26 जनवरी को भी नौ बच्चों की मौत रिकॉर्ड में दर्ज है। चिकित्सालय की मानें तो 27 जनवरी तक बाल चिकित्सालय की आइसीयू सुविधा वाले वार्ड में 17 बच्चे गंभीर हाल में भर्ती थे। इस बीच 28 जनवरी को एकाएक 13 बच्चे गंभीर हालत में आकर भर्ती हो गए। इस दौरान 28 व 29 जनवरी को 4 व 5 बच्चों की मौत हो गई। अब चिकित्सालय का स्पष्टीकरण यह है कि 28 को भर्ती होने वाले कुल 13 बच्चों में 1 की मौत आइसीयू में हुई थी, जबकि 4 अन्य मरने वाले बच्चे पहले से भर्ती थे यानी कुल 5 मौतें एक दिन में हुई, जबकि 29 को 4 मौतें हुई थी। चिकित्सालय का रिमेनिंग रजिस्टर रात 12 से अगली रात 12 बजे तक चलता है। पत्रिका ने रात 8 से सुबह 4 बजे तक के बीच हुई मौतों का हवाला दिया था

रिपोर्ट का नहीं खुलासा
एसएमएस के जांच दल ने हमें जो रिपोर्ट दी है। वह चिकित्सा मंत्री को भेजी गई है। फिलहाल इसका खुलासा नहीं किया गया है।

हेमंत गेरा, शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग

सरकार को भेजी रिपोर्ट
मेडिकल कॉलेज के पांच सदस्यीय दल की रिपोर्ट सरकार को भेजी है। इस पर अगली कार्रवाई जयपुर स्तर पर ही तय होगी। हमने रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। किस स्तर पर रिपोर्ट बाहर आई, इसका पता करेंगे। अधीक्षक से भी पूछताछ होगी।

डॉ. डी.पी.सिंह, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज

गलत समझा गया
दो दिन में 9 बच्चों की मौत दर्ज की गई है। इसमें कोई गलत नहीं। मेरे स्तर पर यह बताया गया है कि एक साथ आइसीयू में भर्ती हुए 13 बच्चों में से केवल एक की मौत हुई थी। बाकी के 8 बच्चे पहले से ही भर्ती थे। उनकी मौत को हमने नहीं छिपाया। हमारे स्तर पर कहीं बात को गलत ढंग से समझा गया है।

डॉ. लाखन पोसवाल, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल