video: ये कर लिया तो नहीं होंगे पति पत्नी के बीच झगड़े

 

भुवनेश पंड्या

उदयपुर . विवाह एक पवित्र बंधन है। आज की युवा पीढ़ी में जागरूकता लाने के उद्देश्य से सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय एवं राजस्थान महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय विवाह पूर्व परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया।
अधिष्ठाता प्रो. साधना कोठारी ने विवाह पूर्व परामर्श के महत्व को समझाते हुए कार्यशाला की विस्तृत रूपरेखा का वर्णन किया। कार्यशाला को 4 तकनीकी सत्रों में पूर्ण किया गया, प्रथम सत्र विवाह संकल्पना धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में द्वितीय सत्र पारिवारिक भूमिका व दायित्व विवाह से संबंधित मनोवैज्ञानिक पक्ष तथा चतुर्थ सत्र मेटा हेल्थ से संबंधित था। मुख्य अतिथि अतिरिक्त आयुक्त आदिवासी क्षेत्र विकास विनीता बोहरा ने आत्मनिरीक्षण, आत्म अनुशंसा और वैवाहिक जीवन का आधार बताया। कुलपति प्रो. जे पी शर्मा ने भारतीय संयुक्त परिवार प्रणाली के अस्तित्व को बचाने पर जोर दिया और कहा कि वैवाहिक जीवन को संवेदनशीलता सहानुभूति जैसे गुणों के द्वारा ही मधुर बनाया जा सकता है।

मुख्य वक्ता जेल पुलिस महानिरीक्षक चेतन उपाध्याय ने कहा कि वैवाहिक जीवन को समग्र रूप से सेवा भाव से ही सुखमय में बनाया जा सकता है। जीवन के लिए सामाजिक शैक्षणिक समानता का होना आवश्यक है। इसमें 200 से ज्यादा विद्यार्थियों ने भाग लिया। राजस्थान महिला आयोग की पूर्व सदस्य सुषमा कुमावत ने बताया कि स्व की भावना को खत्म करना सीखें। प्रो. विजयलक्ष्मी चौहान ने कहा कि मानव संस्कृति के गतिशील रहने के लिए विवाह अनिवार्य संस्कार है। अध्यक्षता करते हुए प्रियंका जोधावत बताया कि स्वयं के लिए कुछ वक्त निकाले और आत्म अवलोकन करें यहां आपके रिश्तो में नई ऊर्जा का प्रवाह करेगा। चतुर्थ तकनीकी सत्र सौंदर्य व मेटा हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. स्वीटी छाबड़ा ने स्वास्थ्य को उन्नत करने का उपाय सुझाया।