VIDEO : मां-पापा को देखते ही मासूम का रुंध गया गला, छलक पड़ी आंखें

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

मां, पापा को देख मासूम की आंखें भर आई, गला रुंध गया। वह एक बार बोला- मां, बाबा... फिर रो गया। ठीक दस मिनट तक मोबाइल वीडियो कॉलिंग में मासूम एक टक देखता रहा और उसकी मां व पिता बार बार पुकारते रहे। कुछ देर बाद मासूम बोला- कब आओगे, मुझे लेने। यह सुनकर उसकी मां पुष्पा की भी आंखें भर आई, तो बेटे की आंखों से भी आंसू छलक पड़े।

भावुकता के हालात शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में बन पड़े। बिहार के चौबड़ा, रफीगंज (औरंगाबाद) से 15 दिसम्बर 2018 से मनीष लापता हो गया, जो भटकते हुए 4 जनवरी 19 केलवा पहुंच गया। चौपाटी पर रोते- बिलखते देखकर लोगों ने केलवा थाने में सूचना दी। हैड कांस्टेबल गोविंद जोशी उसे तत्काल थाने ले गए। फिर चाइल्ड लाइन टीम पहुंची और उसे बाल कल्याण समिति अध्यक्ष भावना पालीवाल के समक्ष पेश किया, जहां से उसे किशोर गृह में शिफ्ट कर दिया। बाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव नरेन्द्र कुमार के साथ जतन संस्थान के चाइल्ड लाइन प्रभारी मरूधरसिंह देवड़ा ने काउंसलिंग कर पहचान के प्रयास किए। बाल कल्याण समिति की अनुमति मनीष का आधार ऑपरेटर प्रमोद पालीवाल द्वारा नया आधार कार्ड बनाया, जिसमें पहले से आधार कार्ड बने होने के नम्बर आ गए। फिर आधार कार्ड के जरिये घर का पता निकाला और बच्चे के माता-पिता से संपर्क किया। बिहार के रफीगंज थाने में बच्चे को माता-पिता को बुलाया और फिर वीडियो कॉलिंग कर मासूम की उसके माता-पिता से बात करवाई। अब उसके परिजनों को राजसमंद बुलाया है, जो अगले दो दिन में राजसमंद आकर बच्चे को ले जाएंगे। इसके लिए किशोर गृह अधीक्षक टीआर आमेटा, बाल कल्याण समिति सदस्य गजेन्द्रसिंह, मोना नंदवाना, परसराम वैष्णव, चंदा सोनी, राजेश दवे, विनिता आदि ने बच्चे की पहचान करने में काफी प्रयास किए।

घबराहट में नहीं बोल पा रहा कुछ
दस वर्षीय मनीष 4 जनवरी 19 को केलवा में मिला, मगर वह इतना घबराया हुआ है कि कुछ भी ठीक से बोल नहीं पा रहा। करीब तीन माह तक लगातार परामर्श के बाद भी वह अवसाद से नहीं उबर पाया। तभी न तो मां, पिता का नाम स्पष्ट बता पा रहा था और न ही उसके घर का पता चल सका। मां का नाम कभी दिव्या भारती बताया, तो कभी कुसुम। उसके पिता का नाम अशोक पाल है।