VIDEO : झीलों के पेटे में पड़ा हजारों टन मलबा

धीरेंद्र् जोशी/उदयपुर. खूबसूरत झीलें हमारे शहर की पहचान है। इनकी देखरेख का जिम्मा जिन सरकारी एजेंसियों का है, वे आंखें मूंदी बैठी हैं। एेसे में शहर की झीलें कूड़ेदान बन गई, वहीं स्वरूप में मनमाने बदलाव से इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। शहर की प्रमुख झीलों में कई जगह ढेरों मलबा डाल दिया गया है।

पिछोला में कई जगह मलबे के ढेर देखे जा सकते हैं जिन्हें हटाने की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। झील प्रेमी बार-बार इस मुद्दे को उठाते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कोई तवज्जो नहीं दी। पिछला मानसून कमजोर रहने से इस बार झीलों में पानी कम है। यह मलबा निकालने का उचित समय है। झीलों से मलबा निकाल लिया जाए तो इनकी भराव क्षमता बढ़ेगी, वहीं इनकी सुंदरता पूर्व की भांति ही निखर उठेगी। नई पुलिया के पास स्वरूपसागर, रंगसागर, कम्हारिया तालाब, धोबी घाट सहित कई जगह भारी मात्रा में इमारती मलबा पड़ा है, जो झील का स्वरूप बिगाड़ रहा है।

नई पुलिया के पास डम्पिंग डिपो

कुछ समय पूर्व तक नई पुलिया के समीप स्वरूप सागर के किनारे मलबा डालने का स्टैंड बना हुआ था। झील के किनारे दीवार भी नहीं थी। एेसे में मलबा डालने वालों ने झील पेटे में बड़ी मात्रा में मलबा डाल दिया। इस क्षेत्र में किनारे पर हजारों टन मलबा आज भी पड़ा है।

दीवार बनाई, नहीं हटाया मलबा
स्वरूप सागर नई पुलिया के पास नगर निगम ने दीवार तो बना दी, लेकिन वर्षों से वहां डाले जा रहे मलबे को नहीं हटाया। यह अब भी झील पेटे में जमा हुआ है।

चेताने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
गत मानसून में स्वरूप सागर-फतहसागर लिंक नहर के किनारे दीवार ढह गई थी। इसका मलबा नहर में गिरा था। पत्रिका ने समाचार प्रकाशित किया तो नगर निगम हरकत में आया और दीवार की मरम्मत करवाई। अधिकारियों ने दीवार की मरम्मत के बाद मलबा हटाने का आश्वासन दिया। यह मलबा आज भी नहर के मुहाने पर पड़ा है।

कटा कुम्हारिया-पिछोला का कनेक्शन
ब्रह्मपोल द्वार के बाहर एक ओर कुम्हारिया और दूसरी ओर पिछोला है। इन दोनों का कनेक्शन सड़क के नीचे से होता था। झील में डाले गए मलबे के कारण अब दोनों का कनेक्शन ही कट गया है।

दस साल बाद भी पड़ा मलबा
करीब दस वर्ष पूर्व शहर में सीवरेज का काम हुआ। इसके चलते कई जगह खुदाई हुई। झील के किनारे बनी दीवार को भी तोड़ा गया। लेकिन इसका मलबा आज तक नहीं उठाया गया। दीवार की मरम्मत भी नहीं की गई है।

अब चौपाटी का मलबा झील पेटे में
स्वरूप सागर के किनारे नगर निगम की ओर से चौपाटी विकसित की जानी थी। इसकी खुदाई के दौरान निकला मलबा झील पेटे में डाला गया। ठेकेदार ने काम पूरा होने पर इसे हटाने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब चौपाटी का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इधर, मलबे ढेर झील पेटे में ही पड़ा है। बारिश होने पर यह पानी में समा जाएगा।

कई बार चेताया
झील विकास प्राधिकरण के सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने बताया कि झीलों में पड़े मलबे का मुद्दा कई बार बैठक में उठाया गया। अधिकारियों को अलग से भी इस बारे में अवगत करवाया लेकिन इसको लेकर अधिकारी गंभीर नहीं। झीलों से इमारती मलबा निकालने का यह उचित समय है। वृहद स्तर पर काम चलाकर मलबे को बाहर निकाला जा सकता है।