Politics News यहां ऐसा भी होता है रहते हैं शहर में मतदान करते हैं गांव में

मेवाड़ किरण@नीमच -

नीमच. शहर के बीचोंबीच करीब एक हजार से बारह सौ की आबादी। यहां मतदाताओं की संख्या करीब 650 से 700 के लगभग है। इसके बाद भी उन्हें नगरपालिका में मतदान करने का अधिकार नहीं है। ग्राम पंचायत में मतदान करने जाते हैं। रेलवे स्टेशन से 50 मीटर दूर इस बस्ती के ग्राम पंचायत क्षेत्र में होने की बात किसी के गले नहीं उतरती, लेकिन यह कड़वी सच्चाई है। न यहां स्ट्रीट लाइट है और न ही सड़क। तसल्ली देने वाली बात यह है कि इन लोगों को पेयजल अवश्य नगरपालिका की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है।

पांच साल नगरपालिका सीमा में रहा शामिल
रेलवे स्टेशन अस्पताल, कृषि उपज मंडी सीमा से जुड़ा यह क्षेत्र धनेरियाकला पंचायत तक ग्राम कुमारिया विरान में शामिल है। जबकि रेलवे स्टेशन के ठीक सामने ही है। यह क्षेत्र पांच साल तक नगरपालिका में शामिल भी रहा है। इस क्षेत्र से लोकेश सैनी नगरपालिका पार्षद का चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके बाद अचानक फिर से इस क्षेत्र को कुमारिया विरान में शामिल कर दिया गया। जबकि जयसिंगपुरा से जुड़े ग्राम अरनियाकुमार को धनेरियाकला पंचायत में जोड़ दिया गया। इस क्षेत्र से नगरपालिका कार्यालय की मात्र डेढ़ किलोमीटर दूर है और ग्राम पंचायत कार्यालय 5 से 6 किलोमीटर। शहर के बीच में होने के बाद भी यहां के मतदाता शहर के मध्य से होकर पंचायत में मतदान करने जाते हैं। जब जब अवसर मिला कि इस क्षेत्र के नगरपालिका सीमा में जोड़ दिया जाए। ग्राम पंचायत के लोगों ने चमकाना शुरू कर दिया। ग्राम पंचायत में टैक्स कम लगता है। नगरपालिका में टैक्स अधिक है। इस डर से निम्न मध्यम वर्ग के लोग पंचायत में ही शामिल रहना चाहते हैं। एक बड़ा वर्ग नगरपालिका में शामिल होने की पैरवी करता है।
फर्जी हस्ताक्षर कर सहमति दे दी
इस क्षेत्र से पार्षद का चुनाव लड़ चुके लोकेश सैनी ने बताया कि इस क्षेत्र में नालियां तक नहीं बनी है। नगरपालिका के सफाईकर्मी आते हैं और राज पैलेस के आसपास सफाई करके चले जाते हैं। वो प्रभावशाली व्यक्ति की होटल है, लेकिन है तो ग्राम पंचायत में। रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने पर हर व्यक्ति यह नहीं जानता कि यह क्षेत्र ग्राम पंचायत में आता है। यहां चहुंओर गंदगी पसरी रहती है। सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करते हैं तो तीन तरह के जवाब मिलते हैं। रेलवे अपनी सीमा की नाली साफ करने की बात करता है। नगरपालिका की नाली बनी है, लेकिन सफाईकर्मी पंचायत क्षेत्र होने से उसे साफ नहीं करते। ग्राम पंचायत कहती है नालियां हमने नहीं बनाई है। यहां के रहवासी मझधार में फंसे हुए हैं। कुछ समय पहले मेरे मकान के सामने एक कागज लगा था। इसपर हस्ताक्षर किए हुए थे। लोगों से अभिमत मांगा गया था कि वे किस क्षेत्र में शामिल होना चाहते हैं। क्षेत्रवासियों को पता नहीं चला और न जाने कब लोगों के हस्ताक्षर कर पंचायत में शामिल होने की पुष्टि फर्जी तरीके से कर दी गई।
कई लोगों के पास राशन कार्ड नगरपालिका के
प्रशासनिक लापरवाही का एक ज्वलंत उदाहरण भी यहां देखने को मिलता है। वर्षों तक ग्राम पंचायत में शामिल रहने के बाद अचानक पांच साल के लिए नगरपालिका में शामिल कर दिया गया। फिर परिसीमन हुआ और फिर से इस क्षेत्र को ग्राम पंचायत में जोड़ दिया गया। यहां के रहवासियों ने राशन कार्ड नगरपालिका से बनवा रखे हैं। समस्या अब यह खड़ी हो रही है कि यदि कोई रहवासी बैंक से लोन लेना चाहता है तो उसे ग्रामीण परिवेश होने की वजह से आवश्यकता अनुसार लोन नहीं मिल पा रहा है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा शहर के बीच स्थित आबादी भुगत रही है।
शहर के बीच का हिस्सा छोडऩे को तैयार हैं
ग्राम पंचायत की ओर से एनओसी दी गई थी, लेकिन नगरपालिका पूरी पंचायत को अपनी सीमा में शामिल करना चाहती है। हम इसके लिए तैयार नहीं है। शहर के बीच का हिस्सा हम नगरपालिका में शामिल कराने को तैयार थे।
- वीरेंद्र पाटीदार, पूर्व सरंपच जयसिंगपुरा
एनओसी नहीं ले रही ग्राम पंचायत
यह बात सही है कि रेलवे स्टेशन के यहां का एक छोटा सा हिस्सा शहर के बीचोंबीच है, लेकिन ग्राम पंचायत जयसिंगपुरा में शामिल है। यहां के लोगों ने इसे नगरपालिका में शामिल करने के लिए कहा भी। नपा की ओर से प्रस्ताव भी भेजा गया। ग्राम पंचायत ने एनओसी देने से मना कर दिया। उनका कहना है कि केवल रेलवे स्टेशन के नजदीक का हिस्सा ही नपा सीमा में शामिल कर लें। ऐसा संभव नहीं है।
- एस कुमार, परियोजना अधिकारी