नई अफीम नीति में उलझकर रह गए सांसद सुधीर गुप्ता ……

मंदसौर – नई अफीम नीति घोषित होने के बाद सांसद सुधीर गुप्ता उसमें उलझकर रह गए है। क्योंकि सांसद के पीआरओ ने 8 सितंबर को ही एक फोटो भेजा था और लिखा था कि सांसद ने वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ला से अफीम नीति निर्धारण के संबंध में चर्चा की और किसान हित में दिए गए सुझावों से भी अवगत करवाया। इसके बाद से ही सांसद पूरे संसदीय क्षेत्र में नई अफीम नीति को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे। जैसे ही नई अफीम नीति में मॉर्फीन के प्रश की शर्त आई तो उनके सारे दांव उल्टे पड़ गए और अब बोल नहीं पा रहे हैं। मंगलवार को भी वे दिल्ली चले गए। इधर प्रतिदिन किसान सांसद के घर पहुंच रहे हैं।

नई अफीम नीति के घोषणा के बाद से किसानों का आक्रोश थम नहीं रहा है। भाजपा किसान मोर्चा भी इसके विरोध में सांसद सुधीर गुप्ता से मिल चुका है। इसके अलावा कुछ किसान संगठन 25 अक्टूबर को नीमच में नारकोटिक्स उपायुक्त कार्यालय का घेराव करने पहुंच रहे हैं। मंगलवार को भी जावरा प्रथम खंड के ग्राम हम खजूरिया सारंग के अफीम काश्तकार सांसद सुधीर गुप्ता के घर पहुंचे। वे अपने साथ एक ज्ञापन भी लाए थे। सभी ने नीमच के अल्केलाइड फैक्टरी में हुई जांच पर ही सवाल उठाए हैं। किसान रामप्रसाद, वरदीचंद्र, भंवरलाल, प्रेमचंद्र, राधेश्याम, रंगलाल, हंसमुख, बंशीलाल, प्रेमचंद्र, मुकेश, नंदराम, देवराम पाटीदार, बाबूलाल, शिवलाल, जूझारलाल, लक्ष्मीनारायण, नागूलाल आदि ने बताया कि गांव में कुल 67 किसानों ने 2016-17 में अफीम की काश्त की थी। नियमानुसार अफीम भी विभाग को दी थी, जिसकी जांच अफीम क्षारोद कारखाना नीमच में हुई। जिसमें सभी काश्तकार संतुष्ट नहीं हैं। हमारा 20 से 25 वर्ष का रिकार्ड देखा जाए तो माल उत्तम किस्म का था। इस वर्ष 67 किसानों में से 39 किसानों के रिकवरी आई है। प्रतिवर्ष जावरा तौल के समय जो भी ग्रेडिंग होती है, इसमें भी नीमच से एक या दो क्लास कम होकर आती है परंतु इस वर्ष जो जांच हुई है, उसमें जरूर गलती हुई है। इसलिए हमारे गांव की अफीम की पुनः जांच की जाए।

दिल्ली में वित्तमंत्री से मिले सांसद

सांसद प्रतिनिधि राजेश नामदेव ने बताया कि मंगलवार को सांसद सुधीर गुप्ता दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली, वित्त राज्य मंत्री शिवप्रकाश शुक्ला, नारकोटिक्स निदेशक दिनेश बौद्घ, अतिरिक्त सचिव राजस्व बीएन शर्मा से मिले और किसानों से अफीम नीति को लेकर प्राप्त सुझावों को उनके समक्ष रखा। सभी ने नीति में संशोधन का आश्वासन दिया।