भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व सांसद का हुआ निधन

उदयपुर। जनसंघ के वरिष्ठ नेता एवं उदयपुर के पूर्व सांसद भानु कुमार शास्त्री का निधन हो गया। शास्त्रीे का शनिवार तड़के उदयपुर में निधन हुआ। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ दिनों बीमार चल रहे थे। शास्त्री राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन रहे।

शास्त्री का जन्म 29 अक्टूबर 1925 को सिंध प्रदेश के हैदराबाद (जो अब पाकिस्तान में है) में प्रसिद्ध ज्योतिषी पं. गिरिधर लाल शर्मा के घर हुआ। भारत-पाक विभाजन की त्रासदी के बाद वे उदयपुर आए और इसी को अपनी कर्मभूमि बनाया।

खासतौर से मेवाड़ अंचल की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। शास्त्री को सादा जीवन और उच्च विचार रखने वाले नेताओं में शुमार किया जाता है। जीवन भर इसी सादगी के साथ रहकर शुचिता का पर्याय बन उन्होंने जनजाति क्षेत्र में शिक्षा व राजनीतिक जागरूकता का कार्य किया।

उनका राजनीतिक जीवन लम्बा रहा। वे पूर्व सांसद व काबिना मंत्री के दर्जे के साथ निगम एवम बोर्डों के अध्यक्ष भी रहे। उन्हें संघ के साधारण स्वयंसेवक से लेकर संसद तक की दीर्घ यात्रा में पं. दीनदयाल उपाध्यक्ष, अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, भैरोसिंह शेखावत, जगन्नाथराव जोशी, सुन्दरसिंह भण्डारी, संघ के सरसंघ चालक मा.स. गोलवलकर (गुरूजी), बाला साहेब, देवरस, एकनाथ रानाडे व माधवराव मूले जैसे नायकों के साथ विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श व सहचर्य का सौभाग्य प्राप्त रहा। 1967 के विधानसभा चुनाव में भानुजी ने तत्का्लीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा के खिलाफ चुनाव लड़ा। चुनाव के पश्चात उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। अपने विरुद्ध आए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

1942 में संघ के स्वयंसेवक बनने के बाद 1951 में भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने। भानुजी ने जीवन के 40 माह जेल में बिताए। इसी दौरान बहन की शादी के लिये पैरोल पर आये और तुरन्त वापस जेल चले गये। उदयपुर सिटी कॉर्पोरेशन के पार्षद से लेकर उपसभापति, विधायक, सांसद, लघु उद्योग निगम व खादी ग्रामोद्योग बोर्ड अध्यक्ष रहे शास्त्री के शुचितापूर्ण, सिद्धान्तनिष्ठ जीवन पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा पाया। 25 जून 1975 से शुरू हुए आपातकाल के संघर्ष के समय वे जनसंघ के प्रदेशाध्यक्ष

सवादंदाता- प्रकाश औदिच्य पाणुन्द।