सांसदों को रास नहीं आ रही प्रधानमंत्री की ‘आदर्श गांव योजना’, कई सांसदों ने अबतक गांवों को गोद नहीं लिया

बांसवाड़ा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र की महत्वकांक्षी योजना ‘सांसद आदर्श गांव योजना ’ सांसदों को रास नहीं आ रही है। यही कारण है कि योजना का तीसरा चरण शुरू होने के उपरांत भी 547 लोकसभा सांसदों में से मात्र 154 एवं 242 राज्यसभा सांसदों में से 39 ने ही योजना के तहत गांव गोद लिए हैं। राजस्थान के सांसदों का भी रुख कमोबेश ऐसा ही है। बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद मानशंकर निनामा ने भी तीसरे चरण में गांव का चयन नहीं किया है। सांसदों की उदासीनता द्वितीय चरण में भी नजर आई। यह है स्थिति केन्द्र सरकार की ओर से 11 अक्टूबर, 2014 को सांसद आदर्श गांव योजना प्रारम्भ की गई। इसमें प्रत्येक सांसद को प्रत्येक चरण में एक गांव गोद लेकर उसको विकसित किया जाना है। वर्ष 2019 तक देश के 2500 गांवों को विकसित करने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन अभी तक लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों की ओर से 1341 गांव ही गोद लिए हैं। चयनित गांवों में भी विकास कार्य कछुआ चाल से चल रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति पहले की तरह ही जस के तस बनी हुई है। चरणवार स्थिति प्रथम चरण में 543 लोकसभा सांसदों में से 500 सांसदों ने गांवों को गोद लिया, वहीं 253 राज्यसभा सांसदों में से 203 ने गांव गोद लिए। द्वितीय चरण में 549 लोकसभा सांसदों में से 317 एवं 242 राज्यसभा सांसदों में से 128 ने सांसद आदर्श गांव योजना में रुचि दिखाई। तृतीय चरण की स्थिति भी बदतर है। इासमें अभी तक 547 लोकसभा सांसदों में से 154 एवं 242 राज्यसभा सांसदों में से महज 39 ने ही इसमें रुचि दिखाई है। हाल-ए-राजस्थान राजस्थान के सांसदों ने पहले योजना में रुचि दिखाई, लेकिन इसके बाद रुझान कम हो गया। द्वितीय चरण में 25 में से 13 लोकसभा सांसदों एवं 10 राज्यसभा में से 9 सांसदों ने गांव गोद लिए, वहीं तीसरे चरण में लोकसभा के 9 एवं राज्यसभा सांसदों के 2 सांसदों ने ही रुझान दिखाया है। बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद मानशंकर निनामा ने पहले सवनिया गांव गोद लिया है, वहीं दूसरे चरण में डूंगरपुर क्षेत्र के रामपुर मेवाड़ा का चयन किया है।