Janmastmi 2019: राजस्थान में यहां तोप चलने पर ही शुरू होता था कृष्ण जन्मोत्सव

डूंगरपुर। Janmashtami 2019 - वागड़ अंचल का हर तीज त्यौहार विशिष्टता लिए हुए हैं। रियासतकाल में धार्मिक उत्सवों का अलग ही रूतबा हुआ करता था। इसी में से एक है जन्माष्टमी और रामनवमी पर तोपों की सलामी।

 

डूंगरपुर रियायत में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी ( Krishna Janmashtami ) पर रात 12 बजे तोप दागी जाती थी। इसके साथ ही शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में घंटनाद के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाते हुए आरती की जाती थी। इसी प्रकार रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे तोप चलाई जाती थी।

 

रियायत काल में आमजन के पास घड़ियां नहीं हुआ करती थी। जन्माष्टमी पर मंदिरों में भजन कीर्तन के आयोजन होते थे। शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मंदिरों में एकत्र होते। रात 12 बजे रियासत की ओर से तोप दागी जाने पर लोगों को कृष्ण जन्मोत्सव की सूचना मिली और इसके साथ ही मंदिरों में घंटनाद शुरू हो जाता था।

 

आजादी के पूर्व तक डूंगरपुर में श्रीकृष्ण ( Janmashtami In Rajasthan ) व राम जन्मोत्सव पर तोलों की सलामी की परंपरा रही। इसके बाद राजपूताना की रियासतों का राजस्थान में विलय हो गया। इसके साथ भारत सरकार ने कानून पारित कर रियासतकालीन तोपों को अवैधारिक करार दे दिया। तोप में एक अतिरिक्त छेद कर उन्हें सामरिक दृष्टि से अनुपयोगी बनाकर मात्र सजावटी सामान बना दिया गया। तब से डूंगरपुर में भी यह परंपरा खत्म सी हो गई।