क्या महाराणा की राजधानी गोगुंदा में अपनी खोई जमीन हासिल कर पाएगी कांग्रेस?

गोगुंदा : राजस्थान का उदयपुर जिला मध्यकालीन मेवाड़ साम्राज्य की राजधानी होने के साथ आधुनिक राजस्थान की राजनीति में भी अहम स्थान रखता है। आदिवासी बहुल उदयपुर जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें- उदयपुर, झाडोल, गोगुंदा, सलुम्बर, खेरवाड़ा, उदयपुर ग्रामीण, मावली और वल्लभनगर हैं।

वहीं गोगुंदा की बात करें तो यह मध्यकालीन राजपुताना के दिनों में बड़ी रियासतों में से एक रियासत थी। महाराणा उदय सिंह के निधन के बाद गोगुंदा में ही होली के दिन महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक हुआ था। गोगुंदा में महाराणा प्रताप ने राजधानी बनाई थी। चित्तौड़गढ़ के बाद उस जमाने में गोगुंदा रियासत दूसरा स्थान रखती थी।

आजादी के बाद राजतंत्र के खात्मे के बाद लोकतंत्र की स्थापना हुई और गोगुंदा रियासत के नाम पर गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र का नाम रखा गया। गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र संख्या 149 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। 2011 की जनगणना के अनुसार गोगुंदा विधानसभा की जनसंख्या 3,55,978 है। वहीं कुल आबादी का 94।96 फीसदी हिस्सा ग्रामीण और 5।04 फीसदी हिस्सा शहरी है। गोगुंदा विधानसभा में अनुसूचित जनजाति की आबादी कुल आबादी का 55।56 प्रतिशत है जबकि अनुसूचित जाती 6।37 फीसदी हैं। 2017 की वोटर लिस्ट के अनुसार गोगुंदा वोटरों की संख्या 2,36,297 है और 286 पोलिंग बूथ हैं।

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में गोगुंदा में 73।7 फीसदी मतदान हुआ था। जिसमें बीजेपी को 45।49 फीसदी और कांग्रेस को 43।29 फीसदी वोट पड़े। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 52।38 फीसदी और कांग्रेस को 37।37 फीसदी वोट मिले थें।

2013 विधानसभा चुनाव का परिणाम

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रताप लाल भील नें गोगुंदा से तीन बार के विधायक और गहलोत सरकार में मंत्री मांगीलाल गरासिया को शिकस्त दी। बीजेपी के प्रताप लाल भील को 69210 वोट जबकि कांग्रेस के मांगीलाल गरासिया को 65865 वोट मिले थें।

2008 विधानसभा चुनाव का परिणाम

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में गोगुंदा विधानसभा सीट से कांग्रेस के मांगीलाल गरासिया तीसरी बार चुन कर आए। गरासिया ने बीजेपी के हंसा राम गरासिया को हराया था। वहीं 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मांगीलाल गरासिया को 56157 वोट जबकि बीजेपी के हंसा राम गरासिया को 46045 वोट मिले थें।

 

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