स्पेशल रिपोर्ट – बड़ीसादड़ी विधानसभा सीट की सियासत पर एक नजर

स्पेशल रिपोर्ट बड़ीसादड़ी –

अरुण कंठालिया  (जाने माने वरिष्ठ पत्रकार -बड़ीसादड़ी  )

चौदहवीं विधानसभा के निर्वाचन की तैयारी शुरू होकर मतदाताओं की सूचियों को अंतिम रूप प्रदान कर दिया गया है। अब इन्तजार है अधिसूचना जारी होने का। राज्य की 171वीं सीट का स्वभाव कांग्रेसी रहा है ओर समय समय पर बदलाव देखे जाते रहे है।

घंटाघर (बड़ीसादड़ी )

पहली बार बड़ीसादड़ी से राज परिवार के जगत सिंह झाला 1952 में भारतीय जनसंघ के टिकिट पर जीत कर जयपुर पहुंचे। 1957 में बड़ीसादड़ी छोटीसादड़ी संयुक्त विधान सभा सीट पर अमरा भाई पायक कांग्रेस से, 1962 व 1967 में शंकरलाल जाट कांग्रेस से , 1967व 1972 में रावत ललित सिह बांसी कांग्रेस से, आपातकाल के बाद जनता पार्टी से 1977 में वृद्धि चन्द जैन जीत कर गए।

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पुनः कांग्रेस के हाथ मे गयी और 1980 व 1984 में उदयराम धाकड़ जीते। 1989 में भारतीय जनता पार्टी से छगन लाल सिसोदिया त्रिकोणीय मुकाबले में जीते। अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वस्त कर दिए जाने पर बर्खास्त हुई भाजपा सरकार के बाद चुनाव में भाजपा के गुलाब चंद कटारिया 1993 व 1998 में निर्वाचित हुए। लगातार तीन बार भाजपा के कब्जे में रही सीट को कांग्रेस के प्रकाश चौधरी ने 2003 में कब्जे में लिया जो 2008 में भी जीते। 2013 में भाजपा के गौतम दक ने परचम लहराया।

1957  (बड़ीसादड़ी छोटीसादड़ी संयुक्त विधान सभा सीट)  – अमरा भाई पायक कांग्रेस से

1962 व 1967 –  शंकरलाल जाट कांग्रेस से 

1967 व  1972 – रावत ललित सिह बांसी कांग्रेस से

1977 –  वृद्धि चन्द जैन जनता पार्टी से 

1980 व 1984 –  उदयराम धाकड़ कांग्रेस से

1989 – छगन लाल सिसोदिया भारतीय जनता पार्टी से

1993 व 1998 – गुलाब चंद कटारिया भारतीय जनता पार्टी से

2003 व 2008 –  प्रकाश चौधरी कांग्रेस से

2013 – गौतम दक भारतीय जनता पार्टी से

210 किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस विधानसभा सीट पर इस बार 252145 मतदाता विधायक का चयन करेंगे जिनमे 127412 पुरुष व 124732महिलाएं तथा 1 किन्नर वोट डालेंगे। कुल 307 मतदान केंद्र होंगे।

2013 से 2018 के कार्यकाल में विकास कार्यों के कीर्तिमान स्थापित कर भाजपा को जीत का पूरा भरोसा है वहीं विधायक दक के प्रति कार्यकर्ताओं की नाराजगी भारी पड़ सकने के चलते टिकिट में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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इन दिनों भाजपा के इसी विधानसभा क्षेत्र के 12 व 6 अन्य बड़े नेता भी यहां से भाग्य आजमाना चाहते है। वहीं कांग्रेस में भी पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी के विरोध में 12 लोग टिकिट लाने के लिए जयपुर व दिल्ली तक के चक्कर लगा रहे है, कई बार आमने सामने हो जाने की घटनाएं भी होगई चाहे सचिन पायलट हो अशोक गहलोत हो सीपी जोशी हो अथवा केंद्रीय नेतृत्व के तरुण कुमार हो अविनाश राय पांडेय हो के सामने भीड़ गए है।

तो भाजपा के भी लोगो ने पिछले माह जिले में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की गौरव यात्रा के समय अलग अलग स्वागत कर अपनी दावेदारी पेश कीहै ओर दक विरोधी खेमे को मुख्यमंत्री राजे ने कोई 2 घण्टे तक समय देकर गंभीरता से सुना है। जहां प्रकाश चौधरी पर आरोप है कि उनके विधायक रहते बड़ीसादड़ी नगरपालिका ओर पंचायत समिति में कांग्रेस को नही जीता पाए तो दक पर भी बड़ीसादड़ी पंचायत समिति में विफल रहने और नगरपालिका में भाजपा के बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस के चेयरमैन बन जाने का आरोप लगे है।यह भी आरोप है कि कार्यकर्ताओं के कैडर पर आधारित पार्टी संगठन भी कमजोर हो गया और 18 माह में पार्टी की बैठक नही होने और 2 बार नगर मण्डल अध्यक्ष बदल देने बाद भी उबर नही पाया है।

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बहरहाल यहां सीट निकाल पाना हर किसी के बूते की बात नही । चित्तौड़ व प्रतापगढ़ जिले के मध्य बड़ीसादड़ी की 23 डूंगला की 26 भदेसर की 7 प्रतापगढ़ की 18 ग्राम पंचायतों 450 राजस्व गावं 1 नगर पालिका 7 पुलिस थाने 3 पुलिस उप अधीक्षक कार्यालय 4 उपखण्ड अधिकारी क्षेत्रों की खाक छाननी पड़ेगी।

अनोपचारिक जातिगत आंकड़ो पर नजर डाले तो इस सीट पर

मीणा 55000,

ब्राह्मण35000,

जैन अग्रवाल माहेश्वरी ओसवाल के 20000,

राजपूत 30000,

धाकड़ 8000,

जाट 12000,

डांगी 8000,

जणवा 8000,

गुर्जर 8000,

नाइ 4000,

कुम्हार 12000,

तेली 6000,

सुथार 4000,

लोहार 4000,

मुसलमान 12000,

स्वर्णकार 8000,

दर्जी कुल्मी पाटीदार गाड़िया लोहार सिकलीगर सरगड़ा वेद 5000 मतदाता है।

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वहीं रेगर वाल्मीकि मेघवाल खटीक मोची जटिया बैरवा धौबी नायक ढोली के 35000 मतदाता है।नोटबन्दी जी एसटी एस सी एसटी एक्ट पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों आरक्षण जैसे राष्ट्रीय मुद्दों के साथ क्षेत्र में गुरुजनों चिकित्सकों के रिक्त पद आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित किये जाने वाले पौषाहार घोटालों को मुद्दा बनाकर विपक्षी मुखर है तो भाजपा के नाराज कार्यकर्ताओं को मनाना टेढ़ी खीर होगी।

इस सीट की यह विशेषता रही है कि इस सीट पर जब भी जीती है तो कांग्रेस और कांग्रेस के विरोध में जीता है तो विपक्षी पार्टी से सिर्फ जैन 1977 में वृद्धिचंद जैन,1989 में छगनलाल सिसोदिया जैन,1993 व 1998 में गुलाब चंद कटारिया जैन,2013 में गौतम दक जैन।

 

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। ये जरूरी नहीं कि मेवाड़ किरण (www.mewarkiran.com) उनसे सहमत हो। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है।  

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