सपनों की इस पुलिया का अब तक अधूरा ‘हूलिया

उदयपुर/ झाड़ोल. हद हो गई इंतहा की! मन्नतों के बाद मंजूर हुई बिरोठी पुलिया का निर्माण एक बार फिर सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़कर स्थानीय लोगों के लिए 'अच्छे सपने के बीच नींद टूटनेÓ जैसा हो गया है। चार वर्ष के बाद सरकार की अच्छी पहल पर शुरू हुए पुलिया निर्माण कार्य से क्षेत्रवासियों को मानसून में जोखिम लेकर स्कूल जाने वाले बच्चों के भविष्य की चिंता और उपखण्ड मुख्यालय के लिए ४० किलोमीटर दूरी तय नहीं करने की उम्मीद थी, लेकिन बीते पांच माह से बंद पड़े पुलिया निर्माण ने लोगों की इस सोच पर ग्रहण लगा दिया है। संवेदक स्तर पर बंद किए गए निर्माण को लेकर लोगों में आक्रोश घर कर रहा है।
भाडेर क्षेत्र से गुजरती वाकल नदी पर बिरोठी-ओड़ा मार्ग को जोडऩे वाली बिरोठी गांव की बड़ी पुलिया बीते मानसून की बरसात में मूल अस्तित्व खो चुकी है। बरसात के दौरान टापू बनने वाले भाडेर का नदी में बहाव के समय समीपवर्ती इलाकों से संपर्क टूट जाता है। कई बार तो लोगों का यह संपर्क सात दिन तक टूटा रहता है। मजबूरी में लोगों को शॉर्ट-कट के चक्कर में बहती हुई नदी को पार कर उस पार जाना पड़ता है। खास तौर पर असुविधा का शिकार स्कूली बच्चे होते हैं, जो घर से स्कूल पढऩे के लिए निकलते हैं और उनके नहीं लौटने तक परिजन चिंतित रहते हैं। बरसात के दौरान सड़क मार्ग से मुख्यालय तक पहुंचने के लिए करीब ४० किलोमीटर सफर तय करना होता है, जबकि पुलिया बनने से यह दूरी करीब १० किलोमीटर कम हो जाती है।
प्रशासन से की गुहार
मामले को लेकर सोमवार को क्षेत्र के ग्रामीणों ने जिला कलक्टर व लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपकर अधूरे पड़े पुलिया निर्माण का कार्य फिर से शुरू कराने की अपील की। लोगों ने बड़ी पुलिया बताते हुए इसमें 40 के करीब पुलिया डालने की मांग की।

ठेकेदार को करेंगे पाबंद
पुलिया निर्माण की स्वीकृति नहीं थी। अतिरिक्त स्वीकृति लेकर निर्माण कार्य शुरू किया गया था। संवेदक को पाबंद कर निर्माण कार्य जल्द ही शुरू कराया जाएगा।
आर. एन. मीणा, अधिशासर अभियन्ता, खण्ड- कोटडा