प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति रामबाण संजीवनी है – डाॅ शिन्दे

नीमच –प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली आधुनिक मंहगाई के युग में सस्ती एवं रामबाण संजीवनी है। वर्तमान मंहगाई के युग में प्राकृतिक चिकित्सा का संसार में कोई विकल्प नहीं है। प्राकृतिक चिकित्सा से ऋशि मुनि भी उपचार करते थे । इसका पुराणों में भी उल्लेख है यह छोटे षिषुओं के लिए भी कारगर है। यह बात उपसंचालक डाॅ केषवराव षिंदे ने कही वे म.प्र. प्राकृतिक चिकित्सा परिशद की नेचुरल हेल्थ एकेडमी द्वारा संचालित एक वर्शीय प्राकृतिक चिकितसा व योग विज्ञान परीक्ष 2017 के परीक्षार्थियों के समाज कल्याण केन्द्र (पष्चिम रेलवे) नीमच रेलवे स्टेषन भवन में रविवार सुबह आयोजित दीक्षान्त समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस अवसर पर प्राकृतिक योग चिकित्सक प्रषिक्षक डाॅ हर्शदराय त्रिवेदी ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली कलियुग में सार्थक सिद्ध हो रही है। अब पष्चिमी लोग भी प्राकृतिक चिकित्सा की ओर दौड़ रहे है कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विनोद मकवाना एवं गुणवंत गोयल ने भी विचार व्यक्त किए । कार्यक्रम में पेंन्षनर संघ के षिवनारायण वर्मा, डाॅ महेष षर्मा, हरिष उपाध्याय, तेजसिंह षक्तावत, आरिफ षेख सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे । कार्यक्रम का षुभारम्भ दीप प्रज्जवलित कर अतिथियों द्वारा किया गया ।

कार्यक्रम में 2017 की योग विज्ञान परीक्षा में रीटा संजय वर्मा, निधि दिलीप लोधा, भूपेन्द्र रोडीलाल, सुषील डोसी, लक्ष्मणसिंह, अखिलेष षर्मा, दिव्या रानी गोयल, सुरेष गोरीलाल निर्वाण आदि उत्तीर्ण परीक्षार्थियों को दीक्षान्त कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में नवप्रवेषार्थी ईष्वर प्रजापति, हर्शिता परदेषी, जितेन्द्र षर्मा, चिराग मेहता, देवीसिंह, उशा मित्तल, जगदीष मोजावत, षोभा कोडावत, प्राची कोडावत, टीना अडनानी उपस्थित थे नव दिक्षित डाॅ दिव्यारानी गोयल ने कहा कि हद्रय रोग एवं बुखार जैसे घातक रोगों का उपचार भी प्राकृतिक चिकित्सा से सम्भव है।

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