मातृकुंडिया में किसानों ने विरोध रैली निकाल दी आंदोलन की चेतावनी

रेलमगरा – मातृकुण्डिया बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले खेतों के प्रभावित काश्तकारों ने अपनी मांगों को को लेकर बुधवार को एक बार फिर से हुंकार भरी है। किसानों ने कस्बे में विरोध रैली निकालकर उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

डूब क्षेत्र में आने वाले गिलूण्ड, कुण्डिया, कोलपुरा, टीलाखेड़ा, खुमाखेड़ा, धुलखेड़ा, जवासिया आदि गांवों के दर्जनों काश्तकार सुबह के समय किसान संघर्ष समिति के सानिध्य में कस्बे के चामुण्डा माता मंदिर परिसर में एकत्रित हुए, जहां बैठक का आयोजन कर आगामी रणनीति पर चर्चा की गई। इसके बाद रैली के रूप में नारे लगाते व प्रदर्शन करते हुए उपखण्ड कार्यालय पहुंचे। यहां पर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया कि किसानों द्वारा पूर्व में किए गए आन्दोलन के बाद जिला स्तरीय सक्षम अधिकारियों ने प्रभावित खेतों का सर्वे कार्य कराने के बाद निर्धारित डीएलसी दर से तीन गुना अधिक राशि को मुआवजे के रूप में देने के लिए कार्यवाही शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसको लेकर एक पखवाड़े से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कोई कार्यवाही शुरू नहीं की गई।

प्रभावितों को जिंक में नौकरी की मांग
साथ ही प्रभावित काश्तकारों को हिन्दुस्तान जिंक में रोजगार दिलाने की मांग पर भी अधिकारियों ने जिंक प्रबंधन से वार्ता करने का आश्वासन दिया, लेकिन इस ओर भी अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। मातृकुण्डिया बांध में भरे पानी को खाली करने की तिथि का निर्धारण भी नहीं किए जाने से दर्जनों खेतों में अभी तक पानी भरा हुआ है। इसके चलते काश्तकार रबी फसलों की बुवाई से भी वंचित हो रहे हंै। काश्तकारों ने समस्या का स्थाई समाधान नहीं होने की दशा में फिर से आन्दोलन करने की चेतावनी भी दी है।

कलक्टर के आश्वासन पर तोड़ी भूख हड़ताल
मातृकुंडिया बांध भराव से प्रभावित किसानों ने गिलूंड में भूख हड़ताल शुरू कर दी। इस पर तहसीलदार रेलमगरा के बाद जिला कलक्टर पीसी बेरवाल ने उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया, तब किसान भूख हड़ताल तोडऩे पर सहमत हो गए। उसके बाद भी अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आने से किसान फिर से विरोध में उतर आए हैं। उल्लेखनीय है कि किसानों के एक प्रतिनिधि मंडल ने संभागीय आयुक्त उदयपुर तक को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया। फिर भी अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस कारण आमजन में प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है।

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