राजसमन्द -चारभुजा मंदिर के लिए सरकार ने दिये सवा तीन करोड़

चारभुजा – धर्मनगरी में विस्तार योजना के तहत विगत एक वर्ष से अटके पड़े विकास कार्यों का शुभारंभ वित्तीय स्वीकृति एवं टेण्डर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बुधवार को लाभ पंचमी हुआ।

सरपंच नाथूलाल गुर्जर ने बताया कि देवस्थान विभाग द्वारा स्वीकृत 3 करोड़ 26 लाख के कार्यों के तहत बुधवार सुबह सवा ग्यारह बजे बस स्टैण्ड व दूध तलाई पर निर्माण कार्य का विधिवित शुभारंभ ठेेकेदार नारयणलाल पहाडिय़ा एण्ड कम्पनी राजसमंद द्वारा भूमि पूजन के साथ करवाया गया। भूमि पूजन पं. मनीष द्विवेदी द्वारा करवाया गया। उन्होंने बताया कि विस्तार योजना के तहत बस स्टैण्ड पर पार्किंग स्थल, सुलभ कॉम्पलेक्स, समतलीकरण, खण्डा व उस पर सीसी रोड तथा दूध तलाई पर घाट के चारों तरफ सीढिय़ा एवं घाट के सामने वाली पहाड़ी पर स्लेब वाइज सीढिय़ों का निर्माण, सुलभ शौचालय का निमार्ण आदि कार्य किए जाएंगे। वहीं लाईटिंग से संबंधित कार्यों के लिए अलग से टेण्डर हुए हैं। भूमि पूजन के दौरान किशनलाल पहाडिय़ा, देवस्थान विभाग के मुन्तजिम तिलकेश जोशी, सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुन्शी भंवरलाल गोखलावत, रोशनलाल प्रजापत, देवस्थान के हस्तीमल पालीवाल, जयकिशन गुर्जर, मोहनलाल पालीवाल, बलवन्त सेन, भगवानलाल गुर्जर मौजूृद थे।

पहले हो गई थी निरस्त
चारभुजा मंदिर विस्तार योजना की योजना एक दशक पहले ही तैयार हो गई, लेकिन सरकार की सत्ता परिवर्तन के साथ ही चारभुजा मंदिर विस्तार योजना बार बार खटाई में पड़ती रही। भाजपा के बाद कांगे्रस सरकार द्वारा भी चारभुजा मंदिर योजना के विस्तार को लेकर कोई ठोस व सकारात्मक प्रयास नहीं किए। इसके चलते अब तक मंदिर के साथ ही कस्बे का सुनियोजित तरीके से विकास नहीं हो पाया।

देशभर से आते हैं श्रद्धालु
गढबोर में चारभुजानाथ के दर्शनों के लिए प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर से सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं की आवक को देखते हुए देवस्थान विभाग द्वारा भी सुनियोजित तरीके से विकास नहीं करवाया। इस कारण आमजन को कोई खास सुविधा मुहैया नहीं हो पाती है। इस कारण चारभुजानाथ के दर्शन करने आने वाले लोग भी कुंभलगढ़ या नाथद्वारा जाकर रात्रि विश्राम करते हैं। चारभुजा देवस्थान विभाग की धर्मशालाएं भी है, मगर रख रखाव और प्लानिंग के अभाव में कोई उपयोगी सिद्ध नहीं हो पा रही है।

पहले हुआ था विरोध
चारभुजा मंदिर विस्तार की शुरुआत में पहले गुर्जर समाज द्वारा ही विरोध किया गया। इसी विरोध के चलते चारभुजा मंदिर विस्तार योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

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