युवा बोले, नेताओं को चुनाव के समय ही क्यों याद आती है हमारी – राजसमंद़ से अनंत मिश्रा की रिपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में अक्सर देश की 65 फीसदी आबादी के 35 साल से कम होने का जिक्र करते रहते हैं। दूसरे दलों के छोटे-बड़े नेता या युवाओं के उत्थान के वादे भी करते हैं और दावे भी, लेकिन भाषणों और चुनावी सभाओं के अलावा क्या सरकारें वाकई साढ़े चार साल तक युवाओं के मुद्दों पर ध्यान देती हैं। राजसमंद से कांकरोली, नाथद्वारा होते हुए उदयपुर पहुंचा तो मन में सवाल कौंधा। क्यों न झीलों की नगरी में सबसे पहले युवाओं को ही टटोला जाए। सो सीधे पहुंच गया मीरा गल्र्स कॉलेज। संभाग में लड़कियों के सबसे बड़े कॉलेज में यह जानने के लिए कि मौजूदा दौर को युवा किस तरीके से समझ रहे हैं।

20 से 25 लड़कियों का समूह हो गया एकत्र। पहले तो संकोच,झिझक। न जाने कौन हैं? क्या बातें पूछना चाहते हैं? लेकिन जब बताया तो चल निकला बातों का सिलसिला। संकोच खुला तो राजस्थान से लेकर दिल्ली तक के हालात पर कह डाली ‘मन की बात’। सबसे बड़ी शिकायत यही कि नेताओं को अधिकतर चुनाव के समय ही क्यों आती है युवाओं की याद!

द्वितीय वर्ष की छात्रा माया कलाल का सवाल! युवाओं (खासकर लड़कियों) के सामने सुरक्षा का मुद्दा भी है तो रोजगार के अवसर जुटाना भी जरूरी है। बात राजस्थान की सीएम से पीएम तक पहुंच गई। स्वीटी ने शिकायत भरे अंदाज में बात कही! बोली सीएम गौरव यात्रा में ऋ षभदेव आईं थी, तो नई सड़क बनी थी। महीने भर बाद ही टूट गई। व्यंग्य भी कसा कि, ‘क्या ये भ्रष्टाचार नहीं है? प्रदेश के गृहमंत्री चूंकि इसी शहर के हैं, सो लड़कियों की सुरक्षा पर चर्चा होनी तो लाजिमी थी।

शुभांगनी जैन ने कहा कि बीते कुछ सालों में महिला कांस्टेबल की भर्ती भी हुई है। साथ खड़ी छात्रा ने हां मिलाते हुए इतना जरूर कह डाला कि ऐसा नहीं कि सब कुछ ठीक हो गया हो। अधिकतर छात्राओं का मानना था कि बीते दिनों में सफाई के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है।

प्रथम वर्ष की छात्रा निधि जैन तपाक से बोल उठी, ‘सब नेता एक जैसे हैं। मैं तो वोट देने ही नहीं जाऊंगी! पूछा मतदाता सूची में नाम है क्या? जवाब मिला, ‘नाम लिखाया ही नहीं!Ó छात्रसंघ अध्यक्ष की बातचीत के दौर में शामिल हो गई। कहने लगी, ‘हम छात्राओं को अपने हक के लिए लडऩाा सिखा रहे हैं।

पिछोला झील का रुख किया तो सैलानियों से मुलाकात हो गई। मावली के दलीचंद ने उदयपुर की ट्रैफिक समस्या पर चिंता जताई। बोले, ‘व्यवस्थाएं सुधर सकती हैं, सुधारने वाला कड़क होना चाहिए। चुनाव पर चर्चा चली तो खेरवाड़ा के पूंजालाल ने दे डाला सपाट जवाब। बोले, ‘बीजेपी को खजानों तो खाली होसी ही। यानी यहां भाजपा को पिछले चुनाव के मुकाबले नुकसान उठाना पड़ेगा। कुरेदा तो अधिकांश लोगों के मुंह से निकलने वाला जवाब, ‘महंगाई मारेगी’। मन में फिर उमड़ा वही सवाल कि आम जनता जिस छोटे स्तर के भ्रष्टाचार और महंगाई से पीडि़त है, नेता उसे गंभीरता से ले रहे हैं अथवा नहीं। चलते-चलते पूंजालाल से कहा ‘सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दामों में कुछ कमी की तो हैं। जवाब पहले से तल्ख, ‘ई ऊं तो ना ही करता। मतलब, इससे तो नहीं करते!

चुनाव नजदीक आ रहे हैं। नेता जोर-शोर से बोल रहे हैं। पांच साल बाद मौका मिला है। तो युवा भी बोलेंगे और अधेड़ भी! शनिवार को आनन-फानन में लगी आचार संहिता के बाद राजनीतिक दलों के कार्यालयों की रौनक बढ़ी नजर आई। शाम को उदयपुर शहर के अलग-अलग भागों में चुनाव को तारीखों के ऐलान पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो बहस थोड़ी गर्म नजर आई। फतहपुरा में एक कोचिंग संस्थान के बाहर खड़े छात्रों से चुनावी चर्चा छेडऩी चाही तो जवाब मिला, हमें तो परीक्षा की तैयारी करनी है। चुनाव की बातें नेताओं से करो।

राजसमंद़ से अनंत मिश्रा की रिपोर्ट