मॉर्फीन को आधार बनाकर अफीम की फसल समाप्त करने की साजिश

मंदसौर। संसदीय क्षेत्र में उत्पादित अफीम देश के कुल रकबे में लगभग 70 प्रश होती है। मंदसौर-नीमच जिले में करीब एक लाख किसान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अफीम फसल से लाभान्वित हो रहे हैं। क्षेत्र की आर्थिक उन्नति का मापदंड मानी जाने वाली फसल को केंद्र सरकार के निर्देश पर वित्त मंत्रालय और नारकोटिक्स विभाग समाप्त करने का प्रयास कर रहा है।

पहले औसत का उच्चतम मापदंड बनाया गया और अब उत्पादित अफीम में मॉर्फीन की न्यूनतम मात्रा 5.9 किग्रा प्रति हेक्टेयर कर लगभग 50 प्रतिशत किसानों के पट्टे काटने का षड़यंत्र सरकार ने पूरा कर लिया है।

यह आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता राजेश रघुवंशी ने बताया कि 2017-18 के लिए घोषित अफीम नीति में किसानों का उपहास उड़ाया गया है, जबकि किसानों ने बड़ा जतन कर तय औसत से अधिक अफीम नारकोटिक्स को दी थी अफीम उत्पादित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की मौन स्वीकृति के साथ मंत्रालय ने अपनी नीति में आश्चर्य चकित करने वाला निर्णय लेते हुए पहली बार मार्फिन को आधार बनाकर किसानों को पट्टों से वंचित करने का खेल पूरा कर दिया है।

अफीम नीति बनाने से पूर्व देश के अफीम उत्पादक जिलों से संबंधित सांसदों के साथ विभाग के आला अधिकारियों की बैठक भी हुई। इसमें मोटे रूप से किसानों को मार्फीन के आधार पर अफीम पट्टे काटने की नीति बनाई गई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि अफीम काश्तकारों के साथ हुए गहरे छल में केंद्र सरकार के साथ यहां के जनप्रतिनिधि भी शामिल थे।

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