जनजाति क्षेत्र में खेती के लिए जरूरी बांधों व तालाबों के भविष्य पर ‘अनदेखी का संकट

उदयपुर/झाड़ोल. उपखण्ड क्षेत्र के बांधों और तालाबों पर सरकारी अनदेखी का संकट मंडरा रहा है। जल संसाधन विभाग के प्रति सरकार का उदासीन रवैया इसकी बड़ी वजह बन रहा है। उपखण्ड मुख्यालय पर स्थित विभागीय कार्यालय की हकीकत यह है कि यहां स्वीकृत पद के जवाब में एक चौथाई से अधिक पद रिक्त पड़े हुए हैं। समस्या के चलते मानसून पूर्व एवं अन्य मौकों पर जलाशयों की देखभाल के कार्य रामभरोसे बने रहते हैं। जड़ें जमा रही समस्या को लेकर उच्चाधिकारी भी अवगत हैं। बावजूद इसके समस्या के समाधान को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
टपकती है छत
बांध और तालाब में रिसाव रोकने वाले विभाग की गत इस कदर हो गई है कि जर्जर भवन की छत से टपकने वाले पानी को रोकने का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। भवन बनने के बाद से अब तक एक भी बार विभाग को कार्यालय मरम्मत के लिए बजट नसीब नहीं हुआ। अब तो थके हारे अधिकारियों ने बजट मांगना भी बंद कर दिया है।

एक नजर में स्टाफ
पद का नाम, स्वीकत, कार्यरत, स्थिति
कनिष्ठ अभियन्ता, 04, 01, 3 रिक्त
वरिष्ठ लिपिक, 01, 00, रिक्त
कनिष्ठ लिपिक, 01, 00, रिक्त
चतुर्थ श्रेणी, 02, 01, 01 रिक्त
चौकीदार, 01,00, रिक्त
जीप चालक, 01, 00, रिक्त

एक वेलदार तक नहीं
आलम इस कदर है कि कनिष्ठ अभियंता ही एलडीसी सहित सभी पदों के कामकाज को देख रहे हैं। कार्यालय के साथ निरीक्षण सहित अन्य काम जेइएन के भरोसे ही चल रहे हैं। झाड़ोल, ओगणा, कन्थारिया बांध की रखवाली को लेकर विभाग के पास तीन शिफ्टों में रहने वाले वेलदार तक नहीं है। इससे पहले मोहम्मद फलासिया, टिंडोल का नाका पंचायत समिति हैण्डओवर किया जा चुा है।

खुद ही प्यासे
विभागीय कार्यालय की स्थिति ये है कि अभियंता कार्यालय में पीने के पानी की भी सुविधा नहीं है। ट्यूबवेल, पाइपलाइन या हैण्डपंप के अभाव में यहां तक आने वाले ग्रामीणों को कई बार प्यासे जाना पड़ता है। अभियंता खुद के स्तर पर पानी लेकर आते हैं।

कई बार लिखा
जर्जर भवन, स्टाफ, पानी की समस्या को लेकर कई बार लिख चुके हैं। उच्चाधिकारियों के स्तर पर हर बार आश्वासन मिलता है।
दिलीप सिंह देवडा, कनिष्ठ अभियन्ता,जल संसाधन विभाग