मंदिर पहुंचे तो हनुमानजी की जगह हुए ‘वनराज’ के साक्षात दर्शन

जावरमांइस . परसाद वन रेंज के तहत वन नाका जावर के ग्राम पंचायत सिंघटवाड़ा में पैंथर ने बैल का शिकार किया। पीपलीखेड़ा निवासी कालूलाल पुत्र होमा मीणा ने बैल को चरने के लिए छोड़ा। दोपहर में नाका बाजार आबादी के पास हनुमान मंदिर परिसर में चरते बैल को पैंथर ने शिकार बना लिया। इसी दौरान मंदिर में पहुंचे लक्ष्मण ने पैंथर को देखा तो भागकर आबादी में पहुंचा। मंगलवार का दिन होने से मंदिर में दर्शनार्थियों की आवाजाही थी, लेकिन आसपास पैंथर की गुर्राहट सुनकर ग्रामीण मंदिर जाने से कतरा रहे थे।
गश्ती दल की नजरों से दूर पैंथर
रुंडेड़ा क्षेत्र में पैंथर और वन कार्मिकों के बीच लुकाछिपी का खेल 3 सप्ताह बीतने के बाद भी जारी है। पैंथर ने फिर से रुंडेड़ा के आबादी क्षेत्र में मवेशी का शिकार किया। पैंथर वन विभाग की पकड़ से दूर होने के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। पैंथर ने मंगलवार को रुंडेड़ा निवासी उमाशंकर हरजोत मेनारिया के बाड़े में भैंस के बछड़े का शिकार किया। इधर, वन विभाग ने नवानिया, रुंडेड़ा में पूर्व में हुई घटना वाले क्षेत्र में पिंजरे लगा रखे हैं। सूचना पर भींडर रेंजर सोमेश्वर त्रिवेदी मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने किकावास, नवानिया, नेतावला में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। मंगलवार को टीम ने अभियान के तहत नहर के आसपास पैंथर की मौजूदगी के निशान जुटाए। टीम में सुरेश मेनारिया, डालचंद गुर्जर, मांगीलाल डांगी, अली अकबर, अल्लानूर, देवीलाल, मोहनसिंह शामिल थे। रुंडेड़ा निवाासी मनोहर मेनारिया का कहना है कि वन विभाग पैंथर को पकडऩे में नाकाम है। ग्रामीणो में आक्रोश है। पैंथर लगातार आबादी क्षेत्र के आसपास शिकार कर रहा है। खेतो में फसलें खड़ी है, ऐसे में भय की स्थिति अधिक है। ड्रोन कैमरे की मदद से सर्च अभियान चलाना चाहिए।
तीन पिंजरे भी लगा रखे
पैंथर लगातार क्षेत्र बदल रहा है। इस बार किया शिकार, पिछली बार की घटना से करीब 7 किलोमीटर दूर है। सर्च ऑपरेशन चल रहा है। तीन पिंजरे भी लगा रखे हैं। प्रयास जारी है। ग्रामीणों को हिदायत दी है कि आग और पटाखे जलाकर पैंथर को भगाएं।
सोमेश्वर त्रिवेदी, क्षेत्रिय वनाधिकारी, भींडर