राजस्थान का यह गांव आज भी आदिमकाल सी जिन्दगी जीने को मजबूर : यहां घरों में बिजली तक नहीं

राजसमंद\ आईडाणा |क्षेत्र की गोवल पंचायत के भेरूदासजी का खेड़ा भील बस्ती में 21वीं सदी के दौर में भी अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं की बात तो दूर अब तक बिजली भी नहीं पहुंच पाई है। जबकि, बस्ती से मात्र 500 फीट की दूरी से ही विद्युत लाइन गुजर रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि वे करीब 3 वर्ष पूर्व विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन भी कर चुके हैं, जिसके बावजूद निगम की ओर से काई कार्रवाई नहीं की गई। लम्बे समय तक विद्युत कनेक्शन जारी नहीं होने एवं विद्युत लाइन नहीं बिछाए जाने पर बस्ती के कुछ ग्रामीणों ने अजमेर विद्युत निगम आमेट के कार्यालय में भी सम्र्पक किया तो वहां से बताया गया कि उनके यहां कनेक्शन के बारे में या उनके द्वारा दिए गए विद्युत कनेक्शन के आवेदनों के निरस्त होने को लेकर भी कोई जानकारी नहीं है। बताया गया कि बस्ती 15 परिवारों की ओर से कनेक्शन के लिए आवेदन किए गए हैं, लेकिन अब तक एक भी परिवार को कनेक्शन जारी नहीं किया गया है।

बस्ती के अधिकांश लोग मजदूर एवं असाक्षर होने के कारण निगम दफ्तर में बार-बार जाने से भी कतराते हैं। ऐसे में इसी वर्ष जुलाई में करीब 15 परिवारों ने फिर से विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन भरे, लेकिन इसके बाद भी निगम की ओर बस्ती में वद्युत कनेक्शन जारी नहीं किये गये। वहीं, बस्ती में विद्युत कनेक्शन देने के लिए लाइन भी नहीं डाली गई। घरों में लाइट नहीं होने एवं पहाड़ी क्षेत्र होने से बस्ती के निवासियों को रात में हर समय जंगली जानवरों का भय बना रहता है। वहीं, बस्ती के करीब 12 बच्चे विभिन्न कक्षाओं में अध्ययन कर रहे है, जिन्हें भी रात के समय पढ़ाई का अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में मजदूर परिवारों के बच्चे विद्यालय समय के बाद घर के कार्य में लग जाते हैं और रात को लाइट नहीं होने से समय होने के बाद भी पढ़ाई नहीं कर पाते।

रात को नहीं हो पाती पढ़ाई
गांव में लाइट नहीं है। पहले जो आवेदन किए उनके बारे में पता किया तो बताया कि निरस्त हो गए हैं। हम लोग दिन में काम पर रहते हैं और रात को लाइट नहीं होने से पढ़ाई नहीं कर पा रहे है।
शंकरलाल भील, भील बस्ती निवासी बीए का विद्यार्थी

रात को लाइट नहीं होने से चिमनी में खाना बनाना पड़ता हैं।
इन्द्रा देवी भील, निवासी भील बस्ती

अभी तक बस्ती में लाइट नहीं आई। जबकि, कुछ ही दूरी से विद्युत लाइन निकल रही है। बस्ती में लाइट नहीं होने से जंगली जानवरों का भय रहता है।