108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में 4 हजार दीपकों से किया महायज्ञ

मेवाड़ किरण@नीमच -

नीमच. 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ स्थल पर बुधवार रात को करीब 4 हजार दीपकों से महायज्ञ किया गया। इस दौरान पूरा पांडाल दीपों से जगमगा उठा, यहां तक की परिसर के बाहर तक दीपमालाओं की कतार लगी हुई थी। इस भव्य आयोजन में सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गायत्री मंत्र का जाप करते हुए महायज्ञ में आहुतियां दी।
यज्ञ से आत्मा और पृथ्वी दोनों शुद्ध होते है। यज्ञ से कष्ट दूर होते हंै मन पवित्र होता है। जब-जब पृथ्वी पर अपराध अत्याचार बढ़ता है। धरती पर भगवान महापुरूष परमात्मा चेतना के रूप में अवतार लेते हैं। भगवान के 24 अवतार प्रमुख है। भगवान मुरली, धर्नुरधारी ही बन के नहीं आते है । भगवान जो कार्य करते है वह लीला है मनुष्य जो काम करता है वह सत्य है लेकिन लीला सत्य नहीं होती है।
यह बात शांतिकुंज हरिद्वार से आए अंतराष्ट्रीय कथावाचक पं. श्यामबिहारी दुबे ने कही । वे 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में बुधवार रात्री 9 बजे जीवाजीराव छात्रावास परिसर में आयोजित 4000 दीपक महायज्ञ के दौरान आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दीप यज्ञ से प्रेरणा का प्रकाश मिलता है मन पवित्र होता है और आत्मा शुद्ध होती है । तभी मोक्ष गति का मार्ग प्रशस्त होता र्है इस अवसर पर जीवन में संस्कार की महत्ता बताते हुए पं. दुबे ने कहा कि मानव को महामानव बनाने की क्षमता भारतीय संस्कार परम्परा की अनुपम देन है । धर्मसभा में ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन आदि भजन कीर्तन प्रस्तुत किए तो श्रद्धालु भक्त मंत्रमुग्ध हो गए । इस अवसर पर सभी श्रद्धालु भक्तों ने अग्निदेव हमें ऊपर उठना सिखाएं, हमें शक्ति सम्पन्न बनाएं कि सामुहिक प्रार्थना की गई। वहीं गायत्री मंत्र का उच्चारण किया गया ।
108 कुंडीय महायज्ञ के तहत गुरुवार सुबह ६ से ७ बजे तक सामुहिक जप, ध्यान एवं प्रज्ञा योग व्यायाम व सुबह ८ बजे से १०८ कुंडीय गायत्री महायज्ञ, संस्कार व पूर्णाहुति की ।