प्राचीन लिपियों पर हुई राष्ट्रीय कार्यशाला, दिखाए पुराने रिकॉर्ड

जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी) के साहित्य संस्थान उदयपुर की प्राचीन लिपियों पर हुई सात दिन की राष्ट्रीय कार्यशाला के चौथे दिन प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. जेके ओझा ने कानोड़ ठिकाने के रिकार्ड्स को प्रतिभागियों को समझाया। उन्होंने कानोड़ ठिकानों के रिकार्ड में उपलब्ध प्रशासनिक, आर्थिक, सामाजिक जानकारियों के अतिरिक्त अंकों को लिखने का तरीका भी समझाया। सभी प्रतिभागियों ने मिलकर ठिकानों के रिकार्ड को पढ़ा। दूसरे सत्र में प्रसिद्ध पुरातत्वविद प्रो. ललित पाण्डे ने ब्राह्मी के अक्षरों की एक तालिका प्रतिभागियों को दी। उन्होंने दक्षिण भारत के उत्तर मेरुर अभिलेख में ऐतिहासिक काल में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

इसी तरह तीसरे सत्र में अभिषेक जैन, गोपाल पालीवाल और ओंकार पालीवाल ने प्राचीन भारत के आहत सिक्कों, गुप्त कालीन सिक्कों और मेवाड़ के सिक्कों से सभी प्रतिभागियों को रूबरू कराया। अंतिम सत्र में संस्कृत के डाॅ. शक्ति कुमार शर्मा ने साहित्य संस्थान के अभिलेखागार में उपलब्ध 16वीं, 17वीं और 18 वीं शताब्दी की पांडुलिपियों की लेखन शैली, विषयवस्तु का परिचय कराया।