्रगजब ही हो गया, जिले को प्रतिदिन 25 सौ लीटर दूध देने वाले गांव में पशुधन का स्वास्थ्य रामभरोसे

उदयपुर/ अदवास. प्रतिदिन 25 सौ लीटर दूध उत्पादन क्षमता रखने वाले
सराड़ा उपखण्ड क्षेत्र के अदवास गांव स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में बीते ४ साल से उदासीनता का ताला लटका है। समस्या का शिकार अजबरा, वगुरुवा, गुड़ा, खानाखेड़ी गांव में पशुपालक हो रहे हैं, जिन्हें पशुओं के मामूली उपचार को लेकर या तो लंबी दूरी तय कर जगत, जावद व अमरपुरा जाना होता है या फिर निजी चिकित्सकों को बुलाकर जेब ढीली करनी होती है। समस्या तब और बढ़ जाती है जब, पशुपालकों को पशुओं का पोस्टमार्टम कराना होता है।

यह है स्थिति
अदवास में वर्ष 2010 में नया चिकित्सालय बना था। चार साल पहले नर्सिंग कर्मचारी की मौत के बाद से चिकित्सालय में ताला लगा हुआ है। एक फ रवरी 2017 में विधायक अमृतलाल मीणा ने बंद पड़े अस्पताल का शुभारंभ किया। पशुपालकों को आश्वस्त किया था कि पशु चिकित्सक की नियुक्ति होगी। लेकिन, दो साल बाद भी हाल जस के तस हैं।

पशुपालन पर निर्भर रोजगार
अदवास सर्किल के लोगों का रोजगार पशुपालन पर आधारित है। चार साल से चिकित्सक नहीं है। समस्या को लेकर दूसरे गांवों के पशु चिकित्सकों पर निर्भर रहना पड़ता है।
देवीसिंह राजपूत, सरकारी डेयरी गुड़ा

जस के तस हाल
चार से बंद चिकित्सालय को लेकर कई बार ज्ञापन दिए। जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
भगवत सिह रोडावत, उपसरपंच अदवास