सुखाड़िया विश्वविद्यालय में हुई 2012 की नियुक्तियों पर भी लटकी तलवार

लिपिक ग्रेड द्वितीय भर्ती 2018 निरस्ती के बाद
बार-बार जांच, नतीजा अभी तक कुछ नहीं

उदयपुर . सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय Sukhadia University में लिपिक ग्रेड-द्वितीय भर्ती 2018 प्रक्रिया को राज्यपाल द्वारा निरस्त करने के बाद 2012 में हुई विभिन्न पदों की भर्तियों पर भी तलवार लटक हुई है। राजभवन ने संभागीय आयुक्त को वर्ष 2012 की नियुक्तियों की एक माह में पुन: जांच कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं। वर्ष 2012 की भर्तियों MLSU Recruitment में धांधली की शिकायतों पर अब तक तीन स्तर पर जांच हो चुकी हैं लेकिन एक भी कमेटी और एजेंसी की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है और न उस पर कोई कार्रवाई हुई है। एसीबी ने भी एक माह पूर्व अपनी जांच पूरा कर ली थी लेकिन उसकी रिपोर्ट भी फाइलों में है।

इतनी जांचें, सही कौन सी मानेंगे

विश्वविद्यालय में 2012 में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के करीब 100 पदों पर भर्तियां हुई थी। इनमें जो चयनित नहीं हुए, उन्होंने 2015 के बाद शिकायतें की। इस पर राज्य सरकार govt of rajasthan ने एक जांच कमेटी गठित की जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन से भर्ती संबंधित तमाम दस्तावेज लिए और जांच शुरू की। यह कमेटी काम पूरा कर पाती, उससे पहले राज्य सरकार ने उसे भंग कर दिया। बाद में राज्यपाल governer of rajasthan ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति प्रो राधेश्याम शर्मा के निर्देशन में जांच कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट राजभवन को भेज दी। इस बीच, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में हुई शिकायत पर भी जांच पूरी हो चुकी है लेकिन इन तीनों की जांच में क्या सामने आया, यह उजागर नहीं हुआ है।

 

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कइयों की मेहनत बेकार

लिपिक ग्रेड-द्वितीय भर्ती निरस्त करने से कई ऐसे अभ्यर्थियों की मेहनत बेकार हो गई जिन्होंने कड़े परिश्रम से इस परीक्षा को पास किया था। वर्ष 2018 में 16 पदों के लिए हुई इस भर्ती के लिए 1050 आवेदन आए थे। कुलपति के परिचित कहे जाने वाले नवीन मिश्रा नाम के अभ्यर्थी के 75 में से 75 अंक लाने से संदेह उपजा और अंत में प्रक्रिया ही निरस्त कर दी गई।

इनका कहना...

वर्ष 2012 में हुई भर्तियों की कई स्तर पर जांचें हुई लेकिन कुछ भी खामी सामने नहीं आई है। विवि अधिनियम के तहत नियुक्तियां हुई लेकिन बार-बार शिकायत होने पर जांचें हो रही हैं, हम पूरा सहयोग कर रहे हैं। - मुकेश बारबार, उप रजिस्ट्रार सुविवि