सीमा विवाद सुलझाने दो राज्यों के अधिकारी पहुंचे

कोटड़ा. (उदयपुर). राजस्थान एवं गुजरात राज्य का 65 साल पुराना सीमा विवाद सुलझाने को लेकर एकबार फिर दो राज्यों के आला अधिकारियों के साथ सर्वे टीम द्वारा सीमावर्ती इलाके में आईं। विवादित जमीन का मौका मुआयना किया। वहीं हर बार बारिश के मौसम में जमीन विवाद को लेकर दोनों राज्यों के किसान मालिकाना हक को लेकर झगड़ जाते हैं। सर्वे टीम देख किसानों में फिर उम्मीद जगी है, कि शायद हमें मालिकाना हक की जमीन वापस मिल जाए। लॉकडाउन से पहले दोनों राज्यों के बीच इसे लेकर समाधान के आसार दिख रहे थे। लेकिन कोरोना के कारण कार्य फिर रोक दिया गया।
कोटड़ा तहसील के सीमा विवाद वाले गांव
कोटड़ा राजस्थान की सीमावर्ती तहसील है, जिनमें अधिकतर गांवों का सीमा विवाद है। इसमें झांझर का क्यारियां फला, आंजनी, बुझा, कालीकांकर का गवरी फला, गांधीसरना, महाड़ी का वियोल, मंडवाल, राजपुर, बुढिय़ा, भूरी ढेबर इत्यादि गांव हैं। शुक्रवार को दोनों राज्यों के राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों, पुलिस प्रशासन एवं वन विभाग की मौजूदगी में राजस्व एवं वन विभाग के नक्शे को मिलाकर सर्वे टीम द्वारा महाड़ी ग्राम पंचायत के वियोल गांव में विवादित जमीन का भौतिक सत्यापन कर मौका मुआयना किया गया।
यह है विवाद
राजस्थान और गुजरात राज्य के दो गांव के बीच की करीब 200 बीघा जमीन का विवाद बीते 65 सालों से चल रहा है । यह विवाद राजस्थान के उदयपुर जिले की कोटडा तहसील एवं गुजरात के बनासकांठा जिले की पोसिना एवं खेड़ब्रह्म तहसील के सीमावर्ती गांवों का है। सीमावर्ती गांव होने से विवाद दो राज्यों का है। क्योंकि जब जमीन सेटलमेंट के समय जमीन खाते की जा रही थी। उस समय इसे राजस्थान सरकार द्वारा 1955 में झांझर गांव के जिन लोगों के हक़ में जो जमीन आती थी। वह भूमि दे दी गई और जब गुजरात का भूमि सेटलमेंट 1958-59 में हो रहा था। तब गुजरात के काश्तकारों को भी इसी जमीन का हिस्सा दिया गया था। इसके बाद से ही दोनों गांव के लोगों के बीच खेती करते समय विवाद उत्पन्न होता है। गुजरात वाले कहते हमारी जमीन है खेती हम ही करेंगे और राजस्थान वाले कहते जमीन हमारी है। इस तरह ये विवाद 1955 से ही चलता आ रहा है। जो की अब तक चल रहा।