सिर पर कलश और देश- परिवार में सुख समृद्धि की कामना

चित्तौडग़ढ़/राशमी. निकटवर्ती पुठवाडिय़ा ग्राम में गुरूवार को अनन्त चतुर्दशी व्रत का उद्यापन किया गया। इस अवसर पर चारभुजा मन्दिर पर हवन यज्ञ किया गया। मन्दिर से ढ़ोल बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली गई। आयोजन में ६५ महिलाएं सिर पर मंगल कलश लेकर चल रही थी। ग्राम के प्रमुख मार्गों से गुजरी कलश यात्रा में महिलाएं नाचती चल रही थी। मन्दिर पर प्रसाद का वितरण किया गया।
सोनियाणा. गांव में अनंत चतुर्दशी व्रत के उद्यापन पर कलश यात्रा निकाली गई। क्षेत्र के गांव दोतड़ी खेड़ा व उचनार खुर्द सहित, सुरपुर दोलतपुरा रोजडा गांव में चतुर्दशी व्रत का उद्यापन किया गया। दौतडीखेड़ा में चतुर्दशी उद्यापन के तहत चारभुजा मंदिर पर हवन यज्ञ किया गया। डीजे साउंड की धुन पर भगवान चारभुजा नाथ की शोभायात्रा निकाली, शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर कलश लिए चल रही थी। चारभुजा मंदिर में पूजा अर्चना के बाद प्रसाद वितरण किया गया। सुरपुर गांव सहित समीपवर्ती गांव दोलतपुरा व रोजडा में भी चतुर्दशी व्रत का उद्यापन किया गया। सुरपुर गांव में 101 महिलाओं सिर पर कलश लिए चल रही थी. दोलतपुरा गांव में 31 महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। रोजड़ा गांव में 51 महिलाओं के सिर पर कलश लिए चल रही थी। भगवान चारभुजानाथ के मंदिर से शुरू हुई जो मुख्य मार्गो से होती हुई शोभायात्रा बस स्टैंड होती हुई चारभुजाजी मंदिर पहुंची, इसके बाद में शोभायात्रा का समापन।
आकोला. अनन्त चतुर्दशी के अवसर पर गुरुवार को आकोला सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों में 600 से भी अधिक महिलाओं ने अनन्त चतुर्दशी व्रत रख उसका उद्यापन किया। व्रत के उद्यापन से पूर्व गुरुवार को महिलाएं नए परिधान पहन कर देवालयों में पहुंची। यहां से वे सिर पर कलश धारण कर कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा के समापन पर विशेष पूजा अर्चना के बाद व्रत का उद्यापन किया।
बिनोता. कस्बे की महिलाओं ने गुरुवार को अनंत चतुर्दशी व्रत का उद्यापन किया। कस्बे में डीजे की धुन के साथ कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में महिलाएं मंगल गीतों के साथ नृत्य करती चल रही थी। कलश यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई खाकल देव मन्दिर पहुंची। वहां महिलाओं ने पूजन कर अनंत चतुर्दशी व्रत का उद्यापन किया।
अनंत कथा श्रवण करने से पापों का होता है नाश
बड़ीसादड़ी. बोहेड़ा कस्बे में लक्ष्मी नारायण मंदिर पर गुरुवार को अनंत चतुर्दशी मनाई गई। कथावाचक पंडित शिवनारायण पुष्करणा ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के दिन महिला व पुरुष प्रात: नदी, तालाब या कुएं पर जाकर स्नान कर शुद्ध कपड़े पहन करअनंत भगवान का व्रत करते हैं। यह व्रत कथा मध्यान्ह काल में की जाती है गोमूत्र गोबर की तलाई बनाकर उसमें बांस की टोकरी रखकर दूर्वा का शेषनाग बनाकर पूजा की जाती है और डोरे के 14 गांठ लगाकर उसकी पूजन कर श्रीदाएं हाथ के तथा पुरुष बाएं हाथ के बांधते हैं व कथा श्रवण कर प्रसाद वितरण किया जाता है। इसी प्रकार अनंत चतुर्दशी के अवसर पर दिगम्बर जैनमंदिर पर विशेष पूजा अर्चना कर कर शास्त्र वाचन कर अभिषेक किया गया। समाजजनों ने प्रतिष्ठान बंद रख भगवान बाहुबली का गुणानुवाद किया गया।