साम्यीक बिना आत्मा का कल्याण नहीं -सिद्धार्थ मुनि

मेवाड़ किरण @ नीमच -

भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के पावन प्रसग पर नवपद की साधना के अवसर पर गुरुवर दिवाकर महाराज की जन्मस्थली पर स्वयं की दीक्षा स्थली संस्कार सूर्य क्रांतिकारी संस्कार मंच प्रणेता सिद्धार्थ मुनि सिद्धराज के सानिध्य में जैन स्थानक में महिला वर्ग में सामायिक साधना दिवस के रूप मे आयोजन हुआ गुरुवर सिद्धार्थ ने मधुर वाणी में बहनों को मार्ग दर्षन दिया समभाव की साधना ही सामायिक है अनुकूल प्रतिकूल स्थिति में सम रहना ही सामायिक है कम खाना, गम खाना, नम जाना तीनो सूत्र जब ह्रदय गमन कर लेते है तो जीवन आनन्दमय बन जाता है किसी के घर की पंचायती ना करे किसी के दुर्गुण न देखते हुए गुणों की ओर ध्यान देवे परिवार में बच्चो को अच्छे संस्कार देवे जिस से भविश्य में परिवार समाज व देष का नाम रोषन कर सके बहनों को षिक्षा देते हुए कहा कि बेटियों की षादी में सामायिक के उपकरण देकर षिक्षा देवे हमेषा धर्म को आगे रखना 16 महासती के जीवन वर्णन बेटियों को सुनाना व कहना नारी दो कुल का नाम रोषन करती है पिहर व सुसराल साथ मे मातायो को गुरुवर ने कहा बेटियों की षादी के बाद सुसराल जाने के बाद दिनभर फोन पे बेटियों से बात न करे अगर बात करनी भी है तो 15 दिन में एक बार कुषल क्षेम पूछ लें रोज रोज दिन भर बात करने से बेटी सुसराल में दिल नही लगा पाती है षादी के 4 महीने नही होते तलाक की बात चालू हो जाती है सभी बहनों को प्रण कराया कि पूरे दिन बेटियों से फोन पे बात न करे व बेटियों को घर को स्वर्ग बनाने की कला सिखावे क्रोध को कंट्रोल करे सास व बहु की जन्म कुंडली षादी के टाइम पर मिला लेवे जिस से पूरा परिवार षांति मय रह सके। गुरुवर के सन्देष को सभी ने आत्मसात किया मंगलपाठ श्रवण किया।

Source : Apna Neemuch