समाधान के लिए जितने भी किए प्रयास, समस्या से नहीं मिली कोई राहत

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

रिटेल सब्जी मंडी की व्यवस्थाएं नई मंडी का निर्माण होने के बावजूद नहीं सुधर पा रही है। नौ साल पहले 506 सब्जी विके्रता सूचीबद्ध थे, जबकि नई मंडी में 82 स्टैंड आवंटित होने के बाद भी 32 विके्रता अवैध रूप से कारोबार कर रहे हैं। फिर भी असल सब्जी विके्रता वंचित रह गए, जो पिछले बीस से तीस वर्षों से गांधी पार्क की पुरानी मंडी में कारोबार कर रहे थे। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या विके्रता पहले से ज्यादा थे, अगर थे तो नगर परिषद ने 82 स्टैंड की क्षमता की मंडी ही क्यों बनाई। अगर वास्तविक विके्रता इतने ही थे, तो वर्षों पुराने विके्रता वंचित कैसे रह गए। इससे नगरपरिषद की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई। इसके चलते करीब दो करोड़ की लागत से नई मंडी बनने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका, जिससे आज भी दर्जनों कारोबारी चौपाटी से श्री बालकृष्ण विद्यालय के द्वार तक सड़क पर ही ठेला लगा कर सब्जी बेच रहे हैं। इस वजह से कांकरोली क्षेत्र में अव्यवस्थित यातायात में सुधार नहीं हो पाया।

82 में से 78 दुकानें आवंटित
श्री द्वारकेश सब्जी मंडी कांकरोली में नगरपरिषद द्वारा 82 दुकानें बनाई गई, जिसमें वर्तमान में सिर्फ 78 दुकानें ही आवंटित हो पाई। नगरपरिषद रिकॉर्ड के मुताबिक 4 दुकानें अब भी खाली है, जबकि मौके पर सौ से सवा सौ लोग सब्जी बेच रहे हैं।

कौन है वास्तविक विके्रता
गांधी पार्क में बैठने वाले वास्तविक रिटेल सब्जी विके्रता कौन कौन है। इसको लेकर नगरपरिषद द्वारा कोई सर्वे नहीं किया गया, जिससे अब कई विके्रता वंचित रह गए, जो वर्ष 2002 से नगरपरिषद व चिकित्सा विभाग में पंजीकृत है। सवाल उठ रहे हैं नई मंडी की क्षमता किस आधार पर तय की गई।

इनका धन के साथ धर्म भी गया
मौजूदा रोडवेज बस स्टॉपेज की जगह पर व्यवस्थित सब्जी मण्डी का सपना दिखाते हुए 19 जुलाई 2010 को सभी सब्जी विके्रताओं को लाइन खींच कर बिठा दिया। तब 506 विके्रताओं के लिए भूखंड आवंटित किए। प्रति विके्रता से 10 रुपए प्रतिदिन के आधार पर महीने के 300-300 रुपए नगरपरिषद में जमा किए गए। इसके तहत नगरपरिषद में 1 लाख 51 हजार 800 रुपए जमा हुए, मगर नगरपरिषद द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई। भूखंड पक्के नहीं होने से विके्रता धूल में ही बैठे और दूसरे दिन तेज बारिश में सब्जी, टोपले बह गए। आनन फानन में विके्रता वापस पुरानी जगह आकर बैठ गए, तब नगरपरिषद व प्रशासन मूकदर्शक बन देखता रह गया।


ठेला चालकों को नहीं मिली जगह
फल, सब्जी, प्याज-लहसूल, खिलौने या जनरल फुटकर सामग्री बेचने वाले ठेला चालकों के लिए भी कोई जगह नहीं है। सब्जी मण्डी के बाहर खड़े रहकर रोजी रोटी चला रहे हैं, मगर यातायात पुलिस की नजर उन्हीं पर गढ़ी रहती है। पुलिसकर्मी डंडा दिखाकर बाहर भगा देता है, मगर आखिर ये ठेला चालक किस जगह खड़े रहेंगे। वर्ष जुलाई 2007 में नगरपालिका द्वारा ठेला चालकों के लिए विट्ठलविलास बाग में खड़े रहने की व्यवस्था की और कुछ भी खड़े भी रहे, मगर व्यवस्था कायम नहीं रह सकी। इसके चलते ठेला चालक अब शहर की सड़क किनारे दर दर भटकने को मजबूर हैं।

आयुक्त-कलक्टर को शिकायत
राष्ट्रीय जन चेतना मंच व सब्जी विके्रता संघ की ओर से नगरपरिषद आयुक्त जनार्दन शर्मा व कलक्टर अरविंद कुमार पोसवाल को ज्ञापन देकर शिकायत की। ज्ञापन में आरोप है कि नई मंडी की दुकान आवंटन में धांधली हुई, जिसमें गुपचुप तरीके से चहेते लोगों को दुकानें दे दी। एक ही परिवार के दो दो जगह दुकानें मिल गई, जबकि बीस से तीस वर्षों से सब्जी बेचकर गुजारा चलाने वाले असल विके्रता वंचित रह गए। आरोप है कि मालीवाड़ा राजनगर क्षेत्र के लोगों को भी कांकरोली में दुकानें आवंटित कर दी, जबकि राजनगर क्षेत्र के लिए दो-दो मंडिया है। इस वजह से कांकरोली, एमड़ी, भाटोली, मोही, राज्यावास क्षेत्र के कई विके्रताओं को दुकानें नहीं मिल पाई।

एक्सपर्ट व्यू : यह हो सकता है समाधान
सब्जी विके्रता रमेश कुमावत ने बताया कि राजनगर, कांकरोली व माणक चौक में तीन सब्जी मंडिया है। तीनों मंडियों में ज्यादातर विके्रता मालीवाड़ा के है, जो गलत है। राजनगर-माणक चौक की मंडी में उस क्षेत्र के विके्रताओं को प्राथमिकता दी जाए और कांकरोली मंडी में कांकरोली व इस क्षेत्र के विके्रताओं को दुकानें आवंटित की जाए। वैसे भी राजनगर की मंडी में दुकानें खाली है। इससे वंचित विके्रताओं को दुकानें मिल जाएगी और शहर की अव्यवस्था भी खत्म हो जाएगी। नगरपरिषद को सर्वे करवाकर विधि विधान से कार्रवाई करनी होगी, तभी इसके सार्थक परिणाम आ पाएंगे।

उचित समाधान निकालेंगे
नई सब्जी मंडी में कुछ विके्रता वंचित रहने, अवैध कारोबारी के बैठने की शिकायत मिली है। इसकी जांच करवाकर उचित समाधान निकाल जाएगा, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित न हो और आमजन को भी कोई परेशानी न हो।
जनार्दन शर्मा, आयुक्त नगरपरिषद राजसमंद

दुकान आवंटन में घपला, इसलिए समस्या
गांधी पार्क में वास्तविक विके्रता को चिह्नित करके उन्हें ही नई मंडी में दुकानें दी जाती, तो कोई वंचित ही नहीं रहता। अब जो भी हालात बने है। नगरपरिषद द्वारा गुपचुप तरीके से चहेते लोगों को दुकानें आवंटित करने से ये हालात बने हैं। प्रशासन को दखल देकर जनहित को ध्यान में रखकर कार्य करवाना होगा, तभी समाधान होगा।
भगवत शर्मा, अध्यक्ष राष्ट्रीय जन चेतना मंच