-समर्थन मूल्य से कम दाम पर बिक रही सोयाबीन

मेवाड़ किरण@नीमच -

नीमच. एक दिन के अवकाश के बाद खुली कृषि उपज मंडी में गुरुवार को सोयाबीन की बंपर आवक रही। हालात यह थे कि किसानों को सोयाबीन मंडी के साथ ही मसाला मंडी सहित मंडी के आम रास्तों पर भी सोयाबीन के ढेर करने पड़े। लेकिन किसान मायूस नजर आए। क्योंकि जहां एक ओर पंजीयन कराने के बाद भी मजबूरी में समय से पहले सोयाबीन बेचना पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर सोयाबीन के दाम समर्थन मूल्य से भी कम मिल रहे हैं।
बतादें की कुछ माह पूर्व शासन द्वारा सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3399 रुपए घोषित किया था। हालांकि यह मूल्य भी किसान को कम लग रहा था। लेकिन वर्तमान में इस दाम से भी कम दामों पर सोयाबीन नीलाम हो रही है। गुरुवार को अधिकतर सोयाबीन के ढेर 2900 से 3000 तक के दाम पर नीलाम हुए। इस मान से समर्थन मूल्य और नीलामी मूल्य में करीब 400 रुपए का अंतर है। हालांकि कुछ ढेर जो काफी बेस्ट किस्म की सोयाबीन के थे वे 3125 रुपए क्ंिवटल तक के दाम पर नीलाम हुए।
12 हजार बोरी की हुई बंपर आवक
जहां गुरुवार को कृषि उपज मंडी में अन्य जिंसों की आवक सामान्य नजर आई। वहीं सोयाबीन की करीब 12 हजार से अधिक बोरियों की आवक रही। ऐसे में सोयाबीन मंडी फूल होने के बाद किसानों ने मसाला मंडी तक पहुंचकर सोयाबीन के ढेर किए। वहीं शेड के आसपास से निकल रहे आम रास्तों पर भी सोयाबीन के ढेर थे। ऐसे में मंडी में पांव रखने की जगह भी नजर नहीं आ रही थी। चूकि अभी भावांतर योजना के तहत खरीदी शुरू नहीं हुई है तो यह हाल हैं। तो जब २० अक्टूबर से भावांतर भुगतान योजना के तहत खरीदी प्रारंभ हो जाएगी तो क्या हाल होंगे। क्योंकि हजारों किसान योजना के तहत खरीदी शुरू होने पर ही सोयाबीन लेकर आएंगे।
मेरी सोयाबीन एक दम बेस्ट किस्म की है। जो 3041 रुपए प्रति क्ंिवटल के दाम पर नीलाम हुई। जब सरकार ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3399 घोषित किया है। तो कम से कम उस दाम पर तो सोयाबीन नीलाम होनी चाहिए। इस प्रकार हमें सीधे तौर पर कम से कम 400 रुपए प्रति क्ंिवटल का नुकसान हो रहा है। ऐसे में मुझे 15 क्ंिवटल सोयाबीन पर कम से कम 6 हजार रुपए का नुकसान है।
-सुनील नागदा, किसान बिसलवास बामनिया, फोटो एनएम 1213
सोयाबीन के दाम किसान को कम से 3400 से 3500 रुपए क्ंिवटल मिलना चाहिए। वर्तमान में सोयाबीन 2300 रुपए से लेकर 3125 रुपए क्ंिवटल तक गुरुवार को बिकी। इस मान से किसान को काफी घाटा है। क्योंकि जरूरत के चलते किसान भावांतर की खरीदी के पहले ही सोयाबीन बेच रहा है। ऐेस में 500 रुपए ङ्क्षक्वटल का सीधा नुकसान तो वह है ही सही। साथ ही कम दाम भी मिल रहे हैं।
-भगत राम, किसान ग्वालदेविया,
बाजार दाम समर्थन मूल्य से कम हैं। वहीं भावांतर भुगतान योजना के तहत खरीदी शुरू होने पर बाजार दाम में गिरावट नहीं आनी चाहिए। पहले लहसुन में ऐसा हो चुका है। जैसे ही भावांतर के तहत खरीदी शुरू हुई बाजार दाम गिर गए। ऐसे में किसान को बोनस मिलने के बाद भी कोई फायदा नहीं होता है। भावांतर में सोयाबीन की खरीदी प्रारंभ होने पर अगर बाजार मूल्य में गिरावट आती है। तो भारतीय किसान संघ इसका विरोध करेगा।
-निलेश पाटीदार, जिला कोषाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ
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