श्रीमद भागवत कथा समापन महा आरती के साथ संम्पन्न

मेवाड़ किरण @ नीमच -

बबलु चौधरी @ ग्राम खेडली में चल रही श्रीमद भागवत कथा में व्यास पीठ से पंडित गोविन्द उपाध्याय के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा जिसके प्रसंग में सुख में दुख में हरदम काम आए वही सच्चा मित्र है
.. सुदामा जी ने भगवान श्री कृष्ण को याद किया एवं जब भगवान की और सुदामा जी बड़े तो भगवान ने उनके ऊपर कृपा की यदि हम ईश्वर की ओर एवं अच्छाइयों की ओर बढ़ते है तो भगवान की कृपा होती है सुदामा जी जब भगवान श्री कृष्ण के पास जाते हैं तब उनके बचपन के सखा भगवान श्री कृष्ण को पता चलता है कि मेरे मित्र मुझसे मिलने आए हैं ब्राह्मण सुदामा आए हैं तब सभा के मध्य से राज्य सिंहासन से दौड़कर अपने बचपन के सखा ब्राह्मण सुदामा को अपने गले से लगाते हैं मित्रता की सच्ची पहचान भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता है दुख के समय भगवान श्री कृष्ण ने अपने मित्र बचपन के सखा सुदामा जी की सहायता की उनके घर जाकर के दो लोकों का राज्य प्रदान करते हैं हर प्रकार से उनके आनंद कर देते हैं अपने मित्र ब्राह्मण सुदामा के चरणों को भगवान श्री कृष्ण अपने आंसुओं से धुला देते हैं अपने राज सिंहासन पर ब्राह्मण देवता को बिठाकर स्वयं उनके चरणों में बैठकर परिवार सहित श्री कृष्ण सुदामा जी के चरणों को धोते हैं उनकी सेवा करते हैं एवं सच्ची मित्रता की शिक्षा प्रदान करते हैं कथा में खेड़ली गांव कंजार्डा पठार में पंडित उपाध्याय ने कहा कि मौज में रहना एवं परमात्मा की खोज में रहना इसीलिए मनुष्य जीवन मिला है अतः इससे हमेशा अच्छे कार्य करना चाहिए मनुष्य जीवन में कोई बुरा कार्य करके इस पर दाग नहीं लगाना चाहिए कथा के अवसर पर पंडित उपाध्याय ने परीक्षित मोक्ष का कथा प्रसंग सुनाया कथा में संपूर्ण अंचल की भीड़ उमड़ पड़ी एवं कथा पांडाल जय जय श्री राधे जय श्री नरसिंह के जयकारे से गूंज उठा समस्त भक्त गणों ने पोथी पूजन किया व कथा समाप्ति बाद सभी भक्तों को प्रसादी में सह भोज कराया गया।

Source : Apna Neemuch