श्रमिको को अपने जाल में फांस रहे कियोस्क वाले

 

भीलवाड़ा ।


श्रम विभाग से जुड़े बिल्डिंग एंड अदर्स कंस्ट्रक्शन वक्र्स वेलफेयर बोर्ड (बीओसीडब्ल्यू) की योजनाओं में गोलमाल की आशंका पर ई-मित्र कियोस्क संदेह के घेरे में आ गए हैं। हाल ही रानीवाड़ा क्षेत्र के ई-मित्र कियोस्क संचालकों की विशेष जांच में सामने आया कि प्रदेश के अन्य हिस्सों के लोगों ने भी यहां से आवेदन किया है। इस पर बोर्ड के कान खड़े हो गए कि आखिर एेसा क्या है, जो सर्वाधिक आवेदन इसी क्षेत्र के ई-मित्र कियोस्क से हुए हैं। प्रदेश हजारों की संख्या में ई-मित्र कियोस्क शहर से लेकर ग्राम पंचायत स्तर संचालित हैं। इसके बावजूद एक ही जगह से बड़ी संख्या में आवेदन होने पर किसी गबड़बड़ी की आशंका पर प्रदेशभर के ई-मित्र कियोस्क की जांच करने के आदेश दिए गए हैं।

इस सम्बन्ध में श्रम आयुक्त नवीन जैन ने श्रम कल्याण अधिकारियों, संयुक्त, उप, सहायक श्रम आयुक्तों से ऐसे संदिग्ध ई-मित्रों की जांच करने के आदेश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि दोषी पाए जाने पर ई-मित्र संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाए। रानीवाड़ा क्षेत्र के विभिन्न ई-मित्र कियोस्क की जांच में सामने आया है कि कई ई-मित्र संचालक आवेदकों से तय से अधिक राशि वसूल करते हैं। इससे लोगों में रोष भी है। कई ई-मित्र संचालक आम आवेदकों को भी निर्माण श्रमिक बनाने की कार्रवाई भी कर रहे हैं, जो गंभीर है।

 

गौरतलब है कि हाल ही केन्द्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को तीन हजार रुपए मासिक पेंशन देने के लिए प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना घोषणा की है। इसके बाद इस योजना में आवेदनों की संख्या में इजाफा हुआ है।

 

इन योजनाओं में मिलता लाभ
कार्यवाहक उपश्रम आयुक्त संकेत मोदी ने बताया कि बीओसीडब्ल्यू योजनाओं में निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास, सुलभ्य आवास योजना, जीवन व भविष्य सुरक्षा योजना, शुभशक्ति योजना, गम्भीर बीमारियों पर व्यय पुनर्भरण, सिलिकोसिस पीडि़त को सहायता, प्रसूति सहायता, स्वास्थ्य बीमा तथा सामान्य या दुर्घटना में मृत्यु या घायल होने पर सहायता देने का प्रावधान है। योजना में रानीवाड़ा क्षेत्र में ज्यादा शिकायतें मिली थी। भीलवाड़ा में अभी शिकायत नहीं मिली है, फिर भी आयुक्त के आदेश के आधार पर जांच कराई जाएगी।