शराब बनाने में काम आने वाली 700 लीटर स्प्रीट बरामद, आरोपी फरार

चित्तौडग़ढ़. आबकारी विभाग ने बुधवार देर रात कार्रवाई करते हुए एक फार्महाउस से अंग्रेजी शराब बनाने में काम आने वाली ७०० लीटर स्प्रीट बरामद की है। इसकी बाजार कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए बताई जा रही है। आरोपी मौके से फरार हो गया। लोकसभा चुनाव के मध्यनजर मुखबीर की सूचना पर जिला आबकारी अधिकारी भारत भूषण चौहान के निर्देशन में सहायक आबकारी अधिकारी राणाप्रताप सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन कर बुधवार देर रात मंगलवाड़ गांव में बने फार्म हाउस पर पहुंची। टीम को आता देख आरोपी रमेश पुत्र शंकरलाल अहीर अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। सहायक आबकारी अधिकारी के नेतृत्व में फार्म हाउस की तलाशी ली तो एक कमरें में चार ड्रम में करीब सात सौ लीटर शराब बनाने में काम आने वाले स्प्रीट मिली। विभाग के अधिकारी गुरूवार सुबह पटवारी को लेकर फार्महाउस पर पहुंचे और पता किया तो जमीन भी रमेश अहीर के नाम पर ही निकली। आरोपी रमेश के खिलाफ पहले भी आबाकारी विभाग में नकली शराब के मामला दर्ज है। सहायक आबकारी अधिकारी राणाप्रताप सिंह ने बताया कि कार्रवाई में जब्त ७०० लीटर स्प्रीट से लगभग १२ सौ पेटी शराब बनाई जा सकती थी। जिसकी कीमत करीब १५-२० लाख रुपए होती। कार्रवाई में आबकारी निरीक्षक निम्बाहेडा के योगेश सालवी, प्रहराधिकारी डूंगला के धर्मवीरसिंह सहित जाब्ता शामिल था।

शराब में स्प्रीट की अधिक मात्रा बन जाती है जानलेवा
आबकारी विभाग के अधिकारी ने बताया कि स्प्रीट का काम शराब बनाने मे आता है। सरकारी फैक्ट्रियों में शराब बनने से पहले स्प्रीट की जांच होती है। शराब बनने के बाद भी उसकी जांच होती, लेकिन अवैध रूप से बनने वाली शराब में यदि स्प्रीट की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो शराब सेवन करने वालों की जान भी ले सकते है।

राजमार्गो के ढाबो पर स्प्रीट का अवैध कारोबार
राजमार्र्गो के कई ढाबों पर स्प्रीट का अवैध कारोबार भी चल रहा है। स्प्रीट सप्लाई करने वाले टैंकर डाइवर, ढाबा संचालक और स्प्रीट तस्कर के बीच सांठगांठ होने से इसकी तस्करी हो रही है। सूत्रों के अनुसार इस क्षेत्र से उदयपुर, राजसंमद, प्रतापगढ़, चित्तौडग़ढ़, डूंगरपुर व बांसवाड़ा में स्प्रीट सप्लाई की जाती है। तस्कर टैंकर ड्राइवर से सांठगांठ कर अवैध रुप से टैंकर से स्प्रीट निकालकर मांग के अनुसार उपलब्ध करा देते है।

टॉर्च की रोशनी में की कार्रवाई
देर रात कार्रवाई करने पहुंची आबकारी अधिकारियों को टॉर्च की रोशनी में कार्रवाई करनी पड़ी। गांव से दूर बने फार्महाउस पर लाईट नहीं होने से अधिकारियों को टॉर्च की सहायता से कार्रवाई करनी पड़ी। आबकारी विभाग के पास मुखबीर की इसकी सूचना तीन-चार दिन पहले ही आ गई थी, लेकिन लगातार बारिश-अंधड़ के चलते विभाग पहले कार्रवाई नहीं कर पाया।