विश्व हिन्दी दिवस पर गोष्ठी संपन्न

मेवाड़ किरण @ नीमच -

जिला लेखक संघ द्वारा 10 जनवरी को हुई अपनी बेठक के साथ इसी दिन को विश्व हिन्दी दिवस जो कि सन् 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री डॅा. मनमोहन सिंह की घोषणा के साथ मान्य किया गया गोष्ठी हूई।
जिसमें डॅा. के. के. जैन ने कहा कि हिन्दी को ही अपनाकर राष्ट्र सेवा करना है। राष्ट्र के साथ विश्व में भी हिन्दी का मान बढ़े ऐसे प्रयास होने चाहिए। श्री रमेश मोर्य ने हिन्दी की गलतियांं पर ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि शासकीय कार्यालयों पर लगे बड़े सूचना पटट् पर ऐसा देख बहुत दुख होता है।
डॉ. सी.पी. उपाध्याय हिन्दी द्वारा अन्य भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करना अच्छा बताते है। इसमें बुराई देखने वालों के वे कहना चाहते है कि यह तो हमारी भाषा की महानता है।
संस्था कोषाध्यक्ष सुरेश चन्द्र शर्मा राष्ट्र भाषा मनाने के साथ हमारे प्रयास हो कि शासकीय कार्यों में अब अंग्रेजी पत्र व्यवहार बंद होने चाहिए।
महेश एम. गोयल हिन्दी को सर्वश्रेष्ठ भाषा बताते हुए कहते है कि इस भाषा ने अनेक भाषाओं के शब्दों को अपने में विलीन कर समृद्धता बढा़ई है।
जगमोहन कटारिया को हिन्दी सर्वाधिक सरल लगती है। विश्वभर के लोगों का हमारी भाषा की और आकर्षण बढ़ रहा हैं, पर दूर्भाग्यवंश हिन्दी क्षेत्र के लोग अंग्रेजी की और दोड़ रहे है।
गुणवंत गोयल ने कहा कि मांगने व दबाव से कुछ हासिल कर भी लिया जाता है तो वह स्थायी नहीं होता। अब हिन्दूस्तान का बाजार हिन्दी के विस्तार को जोर का झटका धीरे से लगा रहा हैं। अब मांग करने की जरूरत नही हिन्दी का विस्तार विदेशियों की आवश्यकता हो चुकी है। संयोग से विश्व हिन्दी दिवस के दिन हुई जिला लेखक संघद की बेठक में उक्त विचार संस्था पदाधिकारियों द्वारा प्रकट किए गए।

Source : Apna Neemuch