वन्यजीव हमले में इंसान की मौत पर दोगुना मुआवजा, जन व पशु हानि की मुआवजा राशि में हुई बढ़ोतरी

मानवेेंद्र सिंह राठौड़/उदयपुर . राज्य सरकार ने वन्यजीवों Wildlife Act से जनहानि एवं पशुहानि के मामलों में मुआवजा राशि की बढ़ोतरी की है। वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान तथा बाहरी क्षेत्र में पैंथर के हमले में इंसानी मौत पर मुआवजा 2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख कर दी गई है जबकि पालतू मवेशी के प्राण गंवाने पर 10 के बजाय 20 हजार रुपए की मुआवजा राशि देने का प्रावधान किया गया है। राजसमंद Rajsamand प्रादेशिक वन क्षेत्र एवं कुंभलगढ़ kumbhalgarh वन्यजीव अभयारण्य में गत पांच वर्ष में पैंथर के हमलों से 10 इंसानों को जान गंवानी पड़ी है जबकि 600 से अधिक पालतू मवेशी पैंथर का ग्रास बने हैं।

अभयारण्य क्षेत्र में इंसान पर पैंथर के सर्वाधिक हमले कुंभलगढ़, नाथद्वारा व खमनोर क्षेत्र में हुए। इसमें रावली टाडगढ़ में हुए हमले भी शामिल हैं। 8 मृतकों के परिजनों को पुराने नियमों के तहत 2-2 लाख के हिसाब से 16 लाख तथा दो मृतक के परिजनों को 4-4 लाख के हिसाब से 8 लाख रुपए की मुआवजा राशि दी है। राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार वन व उसके बाहरी क्षेत्रों में वन्यजीव हमले में मरने वालों को अब 2 लाख के बजाय 4 लाख रुपए की मुआवजा राशि दी जाएगी। अंगभंग होने पर 2 लाख का प्रावधान किया है। इसके अलावा पालतू मवेशी के शिकार पर 20 हजार की आर्थिक राशि मुहैया करायी जाएगी। इसमें भैंस व बैल पर 20 हजार, गाय पर 10 हजार, भैंस व गाय के बछड़े पर 4 हजार, ऊंट पर 20 हजार एवं खच्चर पर 2 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी। वर्ष 2018-19 में वन्यजीवों के हमले में 166 पालतू मवेशी काल के ग्रास बने हैं। उन मवेशी मालिकों को 13 लाख 41 हजार की मुआवजा राशि दी गई है। इसी वर्ष घायल हुए एक व्यक्ति को 40 हजार रुपए की सहायता दी गई है।

पिछले पांच वर्षों में गई 10 इंसानी जाने
वर्ष मौत

2014-15....1
2015-16... 3

2016-17... 3
2017-18...3

2018-19...0
ऐसे मिलेगी आर्थिक सहायता

वन्यजीवों के हमले की सूचना 48 घंटे के भीतर पुलिस व वन अधिकारी को देनी होगी। इंसान व पशु की मौत का सक्षम चिकित्साधिकारी की ओर से जारी प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। मुआवजा राशि घर के मुख्या या उत्तराधिकारी को ही मिलेगी। घायल को उपचार के दौरान चिकित्साधिकारी की ओर से जारी प्रमाण पत्र के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी। इसी तरह मवेशी के मामले में उसके मालिक को तत्काल विभाग को सूचना देनी होगी। मारे गए मवेशी के शव को घटना स्थल से तब तक नहीं हटाया जाए जब तक घटना की जांच क्षेत्रीय वन अधिकारी ने नहीं की हो। साथ ही उसके मांस में किसी प्रकार का विष अथवा घातक पदार्थ नहीं मिलाया गया हो।
इन्हें नहीं मिलेगी सहायता

यदि कोई व्यक्ति वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों का शिकार करने की मंशा से अन्दर गया और हिंसक जीवों ने मार गिराया है तो कोई मुआवजा राशि नहीं दी जाएगी।

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वन्यजीवों के इंसानी व मवेशी पर बढ़ते हमले को देखते हुए राज्य सरकार ने मुआवजा राशि में बढ़ोतरी के नए दिशा-निर्देश जारी किए है। मुआवजा राशि देने की थोड़ी जटिल प्रक्रिया है उसे और सरल किए जाने के प्रयास किए जा रहे है। हमारी कोशिश है कि ऐसे मामलों का दो माह के भीतर निस्तारण किया जाएगा।

-फतह ङ्क्षसह राठौड़,उप वन संरक्षक कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य