रेतम का जलस्तर कम होने से क्षेत्र में संक्रिय रेत माफिया

मेवाड़ किरण @ नीमच -

महावीरसिंह चंद्रावत @ जहां प्रदेश की उठा - पठक में प्रशासन की सख्ती से अवैध कार्यों पर अधिक लगाम लगाई गई। तो इस बार रेत माफियाओं को भी अवैध खनन में निहत्था ही रहना पड़ा। बिते वर्ष की अपेक्षा करें तो गांधी सागर डेम से मिलने वाली चंबल और रेतम नदीं में करिब 8 फिट जलस्तर कम था परंतु चूनाव के चलते रेत माफिया सक्शर मशीनों का प्रयोग करने में असमर्थ रहे। उल्लेखनिय हैं कि बिते दो से तीन माह एेसे बिते जिसमें अवैध कार्यों पर बड़ी सहजता से नियंत्रण किया गया। और खास तौर पर देखा जाए तो आदर्श आचार संहिता में प्रशासन की पूरी शक्ती से भी अवैध कारोबारियों पर डर का सांया रहा तो एक महिना चूनाव में टिकट की दौड़ में गंतव्य से भोपाल और भोपाल से गंतव्य की दौड़ में बित गया। बचे खुचे दिनों में विरोध प्रदर्शन तो नेताओं का स्वागत करने में बित गए। अब सत्ता परिवर्तन होने के बाद प्रशासन एक बार फिर से सख्त हो गया हैं। लेकिन इस बार माफियाओं का रेत उत्खनन बंद तो नहीं होगा परंतु ओपन भी नहीं रहेगा। कुछ नामचिन माफियाओं का तो अभी से गठजोड़ करने का कार्य शुरू हो गया हैं। परंतु वे अबकी बार सक्शर मशीनों के माध्यम से कम बल्की जेसीबी व एनएलटी से अवैध खनन करने की तैयारी में जूटे हुए हैं। अब बस इनकों इंतजार हैं तो जलस्तर का थोड़ा ओर सुख जाने का। यदि बिते वर्ष का अनुमानित आकड़ा देखे तो इस बार काफी कम कार्यवाही देखने में आई रेती उत्खनन पर, लेकिन अब रैतम का सीना छलनी करने की पुरी तैयारी में जूटे माफिया। जहां प्रदेश में वर्तमान सीएम कमलनाथ इस बार पुरे सख्त हैं लेकिन देखना यह रोमांचक होगा की रेत उत्खनन में गठजोड़ करने वाले अधिकारियों के लिए सीएम कितने सख्त रहते हैं। प्रदेश की कमान की लाज किस हिसाब से रखते हैं। वैसे देखा जाए तो जिले का प्रशासन तो काफी सख्त हैं और माफियाओं के लिये भय भी हैं। लेकिन काली कमाई का चस्का लगने वाले नामचिन माफियाओं का इस तरह से बाज आना भी हजम नहीं होगा। देखा जाए तो अंचल के कुछ हिस्सों में रेत उत्खनन में पानी सुखने का इंतजार हैं तो पिल्ली मिट्टी का खनन होने लगा हैं।

Source : Apna Neemuch