राष्ट्रीय युवा दिवस विशेष : हजार दीयों पर भारी इनके हौसलों की चिंगारी, जानें पूरी कहानी

मधुलिका सिंह/उदयपुर . शिकागो में हुए अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन में जब स्वामी विवेकानंद ने भारत का डंका बजाया था, तब वे महज 30 साल के थे। सम्मेलन में उनके भाषण के बाद वे पूरी दुनिया में मशहूर हो गए। वे यूथ आइकन और लोगों के प्रेरणास्रोत बन गए। देश में राष्ट्रीय युवा दिवस उनकी जयंती पर ही मनाया जाता है। आज युवाओं को उनके ही मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। शहर में कई ऐसे युवा हैं जो लीक से हटकर काम कर रहे हैं और किसी ने किसी तरह से अपने समाज, शहर और देश को योगदान दे रहे हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर कुछ ऐसे ही युवाओं से मिलवाया जा रहा है-


इनसे सीखें मदद का जज्बा
20 साल की सुनीता चौबीसा जैसा साहसी और जांबाज हर युवा बन जाए तो उनके लिए कोई भी काम असंभव नहीं होगा। सुनीता खुद भी चाहती हैं कि हर युवा के मन में दूसरों की मदद का जज्बा होना चाहिए। वे यदि कहीं भी किसी को मुसीबत में देखें तो उसका वीडिया बनाने के बजाय उसकी मदद जरूर करें। सुनीता ने दो बार डूबते हुए लोगों को अपनी जान पर खेलकर बचाया है। पहली घटना 2016 की है जब उसने फतहसागर में डूबती हुई महिला को बचाया। इसके बाद 2018 में फतहसागर में डूबते युवक को देख उसने तुरंत पानी में छलांग लगाई और उसकी जान बचा ली। सुनीता को रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड सहित कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। सुनीता ने वर्ष 2016 में1 राज एनसीसी यूनिट में रहते हुए राजस्थान तैराकी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए कारवाड, कर्नाटक के अरब सागर में हुई तैराकी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था जिसमें उन्हें बेस्ट स्वीमर चुना गया था। सुनीता सुखाडिय़ा विवि में एमएससी की स्टूडेंट हंै। इनके पिता पेशे से सरकारी अध्यापक एवं मां गृहिणी हैं।

स्टेनफोर्ड से उदयपुर के गांवों में : राघव
23 साल के राघव ने स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अपने ग्रेजुएशन के दौरान जब इंडिया के पार्टिशन और माइग्रेशन के बारे में पढ़ा तो जैसे उनकी सोच और जीवन दोनों ही बदल गए। पार्टिशन और माइग्रेशन के बारे में जब ज्यादा रिसर्च किया तो इसमें रुचि आने लगी। दरअसल, उनके पिता और दादाजी स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े रहे थे और उनकी मां का परिवार सिंध से माइग्रेट होकर यहां आया था तो इस बारे में और ऐसे लोगों के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई। फिर माइग्रेशन पर काम कर रही संस्था आजीविका से जुड़ाव हुआ और वे उदयपुर आ गए। राघव ने बताया कि उन्हें यहां आए 4 महीने हुए हैं और वे गांवों में जाकर प्रवासियों की समस्याओं को समझने की कोशिश करते हैं और उनके लिए काम करते हैं। ये उनके लिए एक अलग अनुभव है।

 

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एप जो करेगा महिलाओं की मदद : तथागत चतुर्वेदी

टेक्नो एनजेआर में बीटेक फाइनल इयर के छात्र तथागत चतुर्वेदी व मेंटर प्रो. जितेंद्र श्रीमाली ने ‘डेटाकॉप ई एंड एफआईआर एप’ तैयार किया है, जो इंटरनेट पर आधारित नहीं है। इस एप को डाउनलोड करने के बाद इसमें दिया गया बटन आपकी हैल्प करेगा। अगर कोई महिला मुसीबत में है तो इसका बटन दबाने से तुरंत सूचना पुलिस स्टेशंस पर चली जाएगी। पीडि़त को कहीं दूसरी ले जाया जाता है तो इस एप के माध्यम से पीडि़त की लोकेशन भी पता चल जाएगी। साथ ही ये लगातार पीडि़त की लोकेशन को ट्रेक करता रहता है। इस प्रोजेक्ट को कुछ समय पहले ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में ओप गव डेटा हैक प्रतियोगिता में दूसरा स्थान और एक लाख का पुरस्कार मिला।


इसलिए मनाया जाता है
‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए’ का संदेश देने वाले युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, समाज सुधारक युवा युग-पुरुष स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) में हुआ। इनके जन्मदिन को ही राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्मदिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाए जाने का प्रमुख कारण उनका दर्शन, सिद्धांत, अलौकिक विचार और उनके आदर्श हैं, जिनका उन्होंने स्वयं पालन किया और भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी उन्हें स्थापित किया। उनके ये विचार और आदर्श युवाओं में नई शक्ति और ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। उनके लिए प्रेरणा का एक उम्दा स्रोत साबित हो सकते हैं।