राजस्थान में यहां मरीजों को ठीक करने के नाम पर होता है ऐसा काम, देखने वालों के खड़े हो जाते हैं रोंगटें

बांसवाड़ा।


सतरंगी राजस्थान जहां विश्व मानचित्र में अपनी अनोखी छाप छोड़े हुए है वहीं इसका दूसरा रूप भी देखने को मिलता है। आज के आधुनिक युग में जहां हर क्षेत्र में टेक्नोलॉजी अपना प्रभाव दिखा रही है वहीं प्रदेश अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां अंधविश्वास अभी भी चला आ रहा है। दुनिया में आधुनिक चिकित्सा के बंदोबस्त भले ही लगातार विस्तार ले रहे हों, लेकिन दक्षिण राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के गांवों में अब भी लोग रोग निदान के लिए डॉक्टरों के पास इलाज कराने की बजाए देवरों और भोपों का ही सहारा लेते हैं।

इसे जन मान्यता कहें या अंधविश्वास लेकिन, बांसवाड़ा-प्रतापगढ़ हाईवे के किनारे पड़ोली गोवर्धन ग्राम पंचायत क्षेत्र में कुछ ऐसा ही माजरा दिखाई देता है। जहां एक मंदिर के आंगन में रोगियों को नीचे सुलाकर उनके ऊपर से भोपे गुजरते दिखाई दिए।

ग्रामीणों के अनुसार यहां चैत्र नवरात्रि के आयोजनों के तहत शुक्रवार को खाकलिया बावसी मंदिर से बाड़ी विर्सजन का कार्यक्रम था। ऐसे में मंदिर से जुड़े लोग एवं बीमार भी यहां पहुंचे तो भोपों ने उन्हें नीचे सुला दिया और उपर से गुजरे। अंधविश्वास के चलते भोपे इलाज के नाम पर बीमार लोगों के ऊपर से निकलते रहे।

इस बारे में चर्चा पर बताया गया कि मंदिर में हर शनिवार को भी श्रद्धालुओं का तांता लगता है। नवरात्रि के दिनों में भी यहां दूरदराज से रोगी पहुंचते है। लोगों का मानना है कि बाड़ी विर्सजन के दौरान रोगी नीचे लेटें और ऊपर से भोपे गुजरें तो उनकी पीड़ा खत्म या कम हो जाती है। यहां अंधविश्वास यह भी है कि बाड़ी विसर्जन के लिए ऊपर से ले जाने पर किसी पर भूत-प्रेत का साया हो तो वह भी इसके साथ चला जाता है।