राजस्थान के इस शहर में यहां एक रात में बदल जाता है मतदाता का मन, जानिए इसके पीछे की कहानी

भीलवाड़ा।

भीलवाड़ा शहर में 13 ऐसी बस्तियां हैं, जहां आम दिनों में कोई नेता नजर नहीं आते, लेकिन मतदान से एक या दो दिन पहले राजनीतिक दलों के नेता-कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ जाती है। आखिरी समय में वे इन बस्तियों में आकर अपने पक्ष में करने के लिए मतदाताओं की 'आवभगत' करते हैं। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों और उनके प्रबंधकों का मानना है कि ये ही वे बस्तियां हैं, जहां के मतदाता एक रात में परिणाम को प्रभावित करते सकते हैं।

 

मतदान से कुछ दिन पहले से कार्यकर्ता यह जानने की कोशिश करने लगते हैं कि किसकी क्या जरूरत है। शहर में 13 कच्ची बस्तियां तथा 75 से अधिक कॉलोनियां हैं। पत्रिका टीम ने बुधवार को शहर के कई इलाकों का दौरा किया। यहां कई लोगों ने स्वीकार किया कि बस्तियों में केवल चुनाव के समय ही बड़ी-बड़ी गाडिय़ां और नेता आते हैं। अन्य दिनों में तो क्षेत्र का पार्षद भी आकर नहीं देखता। फिलहाल इन कच्ची बस्तियों में भोजन के पैकेट तक पहुंचाए जा रहे हैं।

 

ये हैं कच्ची बस्तियां
कांवाखेड़ा 300 मकान, जगजीवन राम नगर में 250, अम्बेडकर नगर में 275, मजिस्ट्रेट कॉलोनी 300, भोपालपुरा कच्ची बस्ती 350 मकान, गायत्रीनगर 400, बालाजी खेड़ा 200, फकीर बस्ती पुर 250, कीर खेड़ा 150, साठिया बस्ती 150, जाटों का खेड़ा 150, आेडों का खेड़ा 200, हरिजन बस्ती 200 यानी इन बस्तियों में लगभग तीन हजार मकान है। प्रत्येक बस्ती में 700 से 900 मतदाता हैं।


जिला निर्वाचन विभाग सतर्क
जिला निर्वाचन अधिकारी शुचि त्यागी का कहना है कि कोई कार्यकर्ता किसी भी तरह का प्रलोभन देता है, तो पर्यवेक्षकों को शिकायत दर्ज करा सकते हैं। नियंत्रण कक्ष में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। भीलवाड़ा के लिए नियुक्त डॉ. मनीष कुमार के नम्बर 9116629294 हैं। पुलिस पर्यवेक्षक में मोहम्मद इमरान वहाब 9116629290 व अमरनाथ केसरी 9116629298 शामिल है। भीलवाड़ा नियंत्रण कक्ष के फोन नम्बर 01482-232612 पर शिकायत कर सकते हैं।


स्थान: कांवाखेड़ा
प्रभु नामक व्यक्ति का कहना है कि वह 25 साल से रह रहा है। चुनाव के एक या दो दिन पहले नेता आते हैं। खाने के पैकेट के साथ नकदी व शराब बंटती है। उसने कभी इन चीजों को हाथ नहीं लगाया है। प्रभु का बेटा दिव्यांग है। वह बीमार रहता है। आज तक किसी नेता या कार्यकर्ता ने नहीं बताया कि उसका इलाज कहां हो सकता है और सरकार क्या मदद कर सकती है। बस चुनाव के दिनों में वे लोग वोट मांगने आते हैं।

स्थान: अम्बेडकर नगर

अम्बेडकर व जगजीवनराम नगर से जुड़ी इस कच्ची बस्ती के निवासियों का कहना है कि अभी तो केवल कार्यकर्ताओं के लिए भोजन के पैकेट आ रहे हैं। इसके अलावा हर मतदाता के लिए दो-दो सौ रुपए आते हैं। अभी तक कोई भी नहीं आया है। अब दो दिन का समय बचा है। बुधवार की रात कुछ होगा, ऐसी उम्मीद कम है, लेकिन गुरुवार रात बस्ती में कार्यकर्ता घूमते नजर आएंगे।


स्थान: जगजीवन नगर

गिरधारी ने बताया कि इस क्षेत्र की सड़कें टूटी हुई हैं। खुले पड़े नालों में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन कोई समस्या सुनने को तैयार नहीं है। चुनाव का समय आते ही नेता व कार्यकर्ता गाडिय़ां लेकर रात में चक्कर लगाते रहते हैं। पिछली बार नगर परिषद चुनाव में बस्ती में शराब बंटी थी। इस बार अब तक किसी तरह की सामग्री नहीं बंटी, लेकिन चुनाव से एक दिन पहले मनुहार होती हैं।