राजस्थान के इस गांव में मछलियों के लिए बनेगा कंजर्वेशन शेल्टर पिट, गर्मी के दिनों में नही तड़पेगी मछलियां

उमेश मेनारिया/मेनार . बर्ड विलेज मेनार के धण्ड तालाब में मछलियों कंजर्वेशन शेल्टर पिट (मछलियों के लिए गहरा खड्डा ) बनाने के लिए 2.5 लाख रुपये की स्वीकृति हुई है । प्रवासी पक्षियों का मुख्य पनाहस्थल धण्ड तालाब में महादेव मन्दिर के पिछले हिस्से की तरफ रपट के यहां मछलियों के लिए कंजर्वेशन पिट बनाने के लिए 2.5 लाख रुपये की स्वीकृत हुए है। ग्राम पंचायत मेनार द्वारा जल्द ही कार्य शुरू किया जाएगा, ताकि कम बारिश के दौरान गर्मी के दिनों में तालाब के सूखने पर मछलियों की मौत न हो। ग्राम सचिव सिमा रावल एवम उपसरपंच शंकर लाल मेनारिया ने बताया कि धण्ड तालाब में महादेव मन्दिर के पिछले हिस्से में कंजर्वेशन पिट बनाने के लिए ढाई लाख रुपये स्वीकृत हुए है। पक्षी मित्रों एवम वेटलैंड एक्सपर्ट से सुझाव लेकर जल्द ही कार्य शुरू करवाया जायेगा। सरपंच गणपत लाल ने कहा की पिट से स्नान घाट एवं पार्क के पास 12 महीने पानी भरा रहेगा वही पशुओं को गर्मी के दिनों में सुविधा होगी। वही प्रवासी पक्षियों के लिए उपयुक्त भोजन उपलब्ध रहेगा। क्योंकि जलीय जीवों की अधिकता के कारण ही प्रतिवर्ष यहां हजारो प्रवासी पक्षी देश विदेश से प्रवास के लिए आते है। पत्रिका ने खबर प्रकाशित कर चेताया पत्रिका ने गत वर्ष तालाब सूखने से सेकड़ो मछलियों की मोत का मामला उठाकर उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था उस दौरान तो मछलियों को दूसरे तालाब में शिफ्ट कर दिया गया था वही एक्सपर्ट की टीम ने यहां मछलियों के लिए गहरा खड्डा करने की बात कही थी लेकिन जब पूरे साल इस ओर ध्यान नही दिया गया तो इस साल भी तालाब सूखने के कगार पर पहुँचा तो पत्रिका ने 26 फरवरी 2019 को "सूखने के कगार पर पहुँचा धण्ड तालाब "शीर्षक से मछलियों की मौत से पहले ही खबर प्रकाशित कर मुद्दे को उठाया था इसे पूर्व भी खबरे प्रकाशित की थी। इसके बाद ग्राम पंचायत की कोरम बैठक में इसको लेकर प्रस्ताव लिया गया इसके बाद उच्च अधिकारियों द्वारा कंजर्वेशन पिट के लिए 2.5 लाख रुपये स्वीकृत हुए।

 

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12 महीने भरा रहेगा पानी, सुखने पर स्वत: ही आजायेगी मछलियां

कंजर्वेशन पिट धण्ड तालाब महादेव मंदिर के पीछे गर्मी के दिनों में अंतिम समय तक पानी रहने वाले एक निश्चित भु भाग पर करीब 100 मीटर X 200 मीटर भाग को 15 से 20 फीट तक गहरा किया जाएगा। वही इस पिट को अन्य छोटे छोटे खड्डों से लिंक कर दिया जाएगा ताकि तालाब सूखने के बाद भी यहां पानी भरा रहेगा वही गहरा होने से इसमे पानी जल्दी नही सूखेगा। आगे जब ये कभी तालाब सूखने पर या पानी कम होने पर मछलियां उस कुण्ड में स्वतः ही आ जायेंगी और सुरक्षित रहेंगी। तालाब के पेटे में अन्य स्थानों पर फंसी मछलियों को भी लाकर उस कुण्ड में रखा जा सकेगा। सीमित गहरी जगह में पानी अधिक रहेगा जो धीरे—धीरे सुखेगा जिससे मछलिया सुरक्षित रह सकेंगी। हालांकि मेहमान परिंदो के लिए तालाब को वर्ष भर भरा रखने एवं जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाये रखने के लिए दीर्घकालीन उपाय करने होंगे ।