राजस्थान का रण: पांच साल कहां थे नेताजी: उनके किए वादों को आज भी याद कर रहे क्षेत्र के मतदाता

डूंगरपुर। सागवाड़ा विधानसभा सीट पर पिछले कई चुनावों से दोनों पार्टियों में परिवारवाद हावी रहा है। कांग्रेस की राजनीति जहां पूर्व मंत्री भीखाभाई भील के परिवार के इर्द गिर्द घूमती है तो भाजपा की पूर्व मंत्री कनकमल कटारा के।

पिछले चुनाव में भाजपा की ओर से कनकमल कटारा की पुत्रवधू अनीता कटारा ने मोदी लहर के बीच कांग्रेस प्रत्याशी और भीखाभाई के पुत्र सुरेंद्र बामणिया को महज 640 मतों से हराया। युवा और शिक्षित होने से कटारा की विकासोन्मुखी सोच दिखी, लेकिन वह सोशल मीडिया पर ज्यादा छाई रहीं। दूसरी ओर कांगे्रस प्रत्याशी बामणिया चुनाव के बाद क्षेत्र छोड़ कर जयपुर चले गए। ज्यादातर वक्त वहीं बिताया। हालांकि चुनावी साल लगने से उन्होंने वापसी कर क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है।

वर्ष 2013 के चुनाव में भी कांग्रेस ने भीखाभाई के पुत्र और तत्कालीन विधायक सुरेंद्र बामणिया पर ही भरोसा जताया था। भाजपा ने वसुंधरा सरकार की पहली कैबिनेट में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री रहे कनकमल कटारा को कथित सामान्य व ओबीसी विरोधी छवि के चलते दरकिनार कर उनकी पुत्रवधू अनीता कटारा के तौर पर नए चेहरे पर दाव खेला था। सागवाड़ा में नगरपालिका बोर्ड भाजपा का बनने के बाद शहर के सौंदर्यीकरण सहित अन्य कामों में अच्छा तालमेल दिखा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

इक्का दुक्का सड़कों पर हो पाया काम: कटारा ने क्षेत्र की सड़कों को लेकर कई वादे किए थे। मुख्यमंत्री के प्रवासों के दौरान प्रस्ताव बनाकर भी दिए, घोषणाएं भी हुई, लेकिन इक्का-दुक्का का छोड़ कर शेष सड़कों का काम अब तक नहीं हुआ है।

सागवाड़ा से पाटिया मोड़ सड़क पिछले चुनाव में मुद्दा बनी थी। चार साल गुजरने के बाद ही उसकी स्वीकृति आई है। वांदरवेड में माही नदी पर पुल का शिलान्यास भी हाल ही जनसंवाद के दौरान हो पाया है। अनीता ने सभी वर्गों को साधने की कोशिश जरूरी की, लेकिन एक वर्ग विशेष की नाराजगी भी सामने आई थी।

दूसरी ओर आदिवासी समुदाय में बन रही एक अलग विचारधारा भी कटी-कटी सी है। इस सब से अलग पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर नए चेहरों को ही इर्दगिर्द रखना भी अनीता के लिए आने वाले चुनावों में बड़ी चुनौती बना हुआ है। कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र बामणिया चुनाव में हारने के बाद ज्यादा समय सागवाड़ा मेें नहीं रहे।

उनका प्रवास जयपुर ही रहा। हालांकि बीच-बीच में सागवाड़ा आते रहे, लेकिन पार्टी कार्यक्रमों में भी उनकी सहभागिता कम ही दिखी। जनहित के किसी मुद्दे पर सत्ता के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में भी वह कभी-कभार ही नजर आए। चुनावी साल लगते ही उन्होंने जयपुर छोड़ कर सागवाड़ा में डेरा डाल दिया है। पिछले छह माह से वह लगातार फील्ड में जुटे हुए हैं।


कटारा के ये दावे
चुनाव के समय जनता से किए वादे पूरे करने के लिए हर संभव प्रयास किया। सड़कों के काम प्रगति पर हैं। भीखाभाई सागवाड़ा नहर का काम भी अंतिम चरण में चल रहा है। शहरी सौंदर्यीकरण में भी हरसंभव सहयोग किया है। वांदरवेड पुल से हजारों लोग लाभान्वित होंगे। अनीता कटारा, विधायक

कांग्रेस का आरोप
निजी कारणों से जयपुर रहा, लेकिन कार्यकर्ताओं और जनता से हमेशा संपर्क में था। हर माह सागवाड़ा आया तथा जनता के सुख-दुख में शामिल हुआ। विधायक ने सागवाड़ा वासियों को कई स्वप्न दिखाए थे, लेकिन वे उन्हें पूरा नहीं कर पाई। पूरे क्षेत्र आज भी सड़कों की बदहाली दिखती है। सुरेंद्र बामणिया, पराजित प्रत्याशी, कांग्रेस

सागवाड़ा विधानसभा क्षेत्र
हुआ था नजदीकी मुकाबला, भाजपा की अनीता कटारा महज 640 वोट से हुई थीं विजयी, विजयी प्रत्याशी सोशल मीडिया पर सक्रिय ज्यादा, पराजित प्रत्याशी अब आए क्षेत्र