यहां पर वैज्ञानिकों ने कहा कि हरित क्रांति के बाद कृषि तकनीकों में आया है बदलाव

उदयपुर. क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति संभाग चतुर्थ-अ की दो दिवसीय बैठक का शुक्रवार को अनुसंधान निदेशालय सभागार में समापन हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एमपीयूएटी कुलपति जेपी शर्मा ने कहा कि कृषकों की समस्याओं को विवि के वैज्ञानिकों के साथ विचार विमर्श करने तथा इन समस्याओं पर अनुसंधान कर पुन: कृषि विभाग की ओर से किसानों को जानकारी देने में बैठक का महत्वपूर्ण योगदान है। हरित क्रांति के बाद कृषि तकनीकों के क्षैत्र में खासतौर पर बीज, मशीन तथा रिमोट संचालित तकनीकों में व्यापक बदलाव आया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुसंधान निदेशक डॉ. ए. के. मेहता ने कहा कि वैज्ञानिकों को किसानों की समस्याओं के आधार पर अनुसंधान करना चाहिए। ताकि किसानों को अधिकाधिक फायदा मिल सके। जोर दिया कि प्रथम पंक्ति प्रदर्शन में कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. स्नेहलता माहेश्वरी ने कहा कि खेती में महिलाओं की अहम भूमिका है। इस बैठक में क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. एस. के. शर्मा ने कृषि संभाग चतुर्थ अ की कृषि जलवायु परिस्थितियों तथा नई अनुसंधान तकनीकों के बारे में प्रकाश डाला। संयुक्त निदेशक कृषि विभाग, भीलवाड़ा के आर. जी़. नायक तथा भीलवाड़ा, चित्तौडगढ़, राजसमन्द एवं उदयपुर के उप निदेशक कृषि एवं अन्य अधिकारी, ग्राह्य अनुसंधान केन्द्र, चित्तौडग़ढ़ एवं एमपीयूएटी के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।
बैठक के प्रारम्भ में आरजी नायक, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग, भीलवाड़ा ने गत खरीफ में वर्षा का वितरण, बोई गई विभिन्न फसलों के क्षेत्र एवं उनकी उत्पादकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होनें संभाग में विभिन्न फसलों में खरीफ 2018 के दौरान आई समस्याओं को पेश किया। बैठक को डॉ. सुमन सिंह, निदेशक, छात्र कल्याण, डॉ. ऋतु सिंघवी, अधिष्ठाता, गृह विज्ञान महाविद्यालय तथा डॉ. आई. जे. माथुर, ने भी संबोधित किया।