मेरे मन अति वसो सुन्दर चतुर सुजान, लालन…

श्रीजी बावा को धराया अलौकिक शृंगार
बगीचे में बिराजे निधि स्वरूप लाड़ले लालन
प्रमोद भटनागर
नाथद्वारा. आराध्य प्रभु श्रीनाथजी को फागुन मास के चलते अलौकिक शृंगार धराया गया, वहीं निधि स्वरूप लाड़ले लालन राजभोग की झांकी के समय पुराने बगीचे में पधारे, जहांं पर भव्य मनोरथ का आयोजन हुआ। इस दौरान जबर्दस्त गुलाल उड़ाई गई। फागुन मास के चलते श्रीजी बावा को भी गुरुवार को नियम का मुकुट काछनी का शृंंगार धराया गया। प्रभु को चोवा की चोली, हरे रंग के सूथन कांछनी व पीताम्बर धराया। वहीं सभी वस्त्र रुपहली जरी की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित, ठाड़े वस्त्र सफेद जामदानी एवं आभूषण सेवा में लाल हरे व मेघश्याम मीना एवं जड़ाव के स्वर्णाभूषण, श्रीमस्तक पर मीना का मुकुट शीशफूल, श्रीकर्ण में जड़ाव, मयूराकृति कुंडल धराए, बायीं ओर मीना की शिखा चोटी भी धराई गई। राजभोग की झांकी के समय श्रीनाथजी के बड़े मुखिया इन्द्र वदन गिरनारा ने ठाकुरजी की गाल व दाढ़ी पर गुलाल की सेवा धराई गई साथ ही ठाकुरजी के अंग वस्त्रों को भी गुलाल अबीर की सेवा धरा गुलाल व अबीर की पोटली भी बांधी। जबकि द्वितीय मुखिया प्रदीप सांचीहर के द्वारा धवल पिछवाई पर अबीर गुलाल आदि को छांटकर विविध रूप में आकृतियां उकेरी गई। उसके बाद श्रद्धालुओं पर गुलाल उड़ाई गई। वहीं कीर्तनकारों ने इस अवसर प विशेष कीर्तन तुम मेरे मन अति वसो सुन्दर चतुर सुजान..., करगहि मोहन मुरलिका नीके सुनावो तान..., मोर मुकुट शोभा बनी सुंदर तिलक सुभाल ललना, मुखपर अलकावलि विथुरी मनहु कमल अलिमाल ललना का गुणगान किया।
कांछनी का भाव: श्रीजी बावा को शृंगार में कांछनी जो धराई जाती है, उसमें जो घेर जो होता है उस घेर का भाव भक्तों को एकत्रित करने का भाव माना गया है।
बगीचा में पधारे लाड़ले लालन: प्रभु श्रीनाथजी के निधि स्वरूप नवनीतप्रियाजी लाड़ले लालन महाप्रभुजी की बैठक के पासवाले बगीचे में फाग खेलने पधारे, इस अवसर पर गोस्वामी बालक ने उनकों सेवा धराते हुए राजभोग के समय अपार गुलाल उड़ाई, जिससे पूरा बगीचा लाल रंग से सराबोर हो गया।
बगीचा के उत्सव का भाव : व्रज में नन्दगांव के पास नंदरायजी का बगीचा है, जहां नंदकुमार फाग खेलने के लिए पधारते थे, उसी भाव से बैठक के बगीचे को नंदरायजी का बगीचा मानकर नवनीतप्रियाजी वहां राजभोग व उत्सव भोग अरोग कर फ ाग खेलने पधारे।
रसियागान पूरे परवान पर: मंदिर में राजभोग के समय गाए जाने वाले रसिया गान पूरी रंगत में है। होलिकाष्टक प्रारंभ होने के साथ ही ग्वालबालों में पहले रतन चौक में बैठकर और फिर डोल तिबारी में खड़े रहकर रसिया का गान किया।
गोशाला में रसिया गान आज
नाथद्वारा में फागुन मास के चलते शुक्रवार दोपहर बाद प्रभु श्रीनाथजी मंदिर की नाथूवास स्थित मुख्य गोशाला में रसिया गान का आयोजन किया जाएगा। जिसमें ग्वाल बालों के द्वारा रसिया गाए जाऐंगें । फागुन मास के चलते इन रसिया को सुनने क्षेत्र के कई लोग पहुंचते हैं। उधर शहर के समीप स्थित कोठारिया में बुधवार देर शाम गोकुल चन्द्रमाजी मंदिर पर भव्य रसिया गान का आयोजन किया गया। जिसमें ग्वाल बालों ने फागुन के रंग में रंगते हुए पहले बैठकर रसिया का गान किया उसके बाद सभी ग्वाल बालों ने खड़े होकर रसिया गाए।
चारभुजा प्रतिपाला, म्हारो मन हर लीनो...
चारभुजा. होलिका रोपण के बाद चारभुजा धर्मनगरी में महीनेभर होलिकाष्ठक की धूम चलती है। इसी के तहत गुरुवार को भी चंग की थाप पर मनमोहक होलिकाष्टक की धूम रही। पुजारी ने शयन आरती के बाद चंग की थाप पर रसीयागान का संगान किया। चंग की थाप पर चारभुजा प्रतिपाला म्हारो मन हर लीनो..., जैसे भक्तिभरे भाव से ओतप्रोत रसियागानों का संगान किया।
होलिकाष्टक 20 मार्च तक चलेगा। 21 से चारभुजानाथ का पन्द्रह दिवसीय फागोत्सव मेला प्रांरम्भ होगा। इसके लिए देवस्थान विभाग द्वारा तैयारियां की जा रही हैं।
होलाष्टक के साथ फागुन की धमाल शुरू, राळ के दर्शन
राजसमंद. पुष्टि संप्रदाय की तृतीय पीठ प्रभु श्री द्वारिकाधीश मंदिर में गुरुवार से होलाष्टक के साथ फागुन की धूम आरंभ हो गई। गुरुवार को श्रृगार में तृतीय पीठाधीश्वर बृजेश कुमार ने प्रभु को श्रंगार में श्री मस्तक पर सोने का मुकुट खसखस की दोनों काछनी, वैसे सूथन वैसा पितांबर, वैसा लपेटा सोने के आभरण, श्वेत चिकने ठाड़े वस्त्र तथा वनमाला धराई गई। इसके बाद राजभोग में प्रभु द्वारकाधीश को निज तिवारी में बिराजित किया गया, जहां पर बगीचा बांधा। यहां प्रभु श्री को अबीर गुलाल से फाग खेलाई गई, वहीं सायकाल शयऩ के दर्शनों में प्रभु के सम्मुख राळ उड़ाई गई। इससे पूर्व बृजवासी ग्वाल बालों द्वारा कमल चौक में व प्रभु के सम्मुख रसिया गान किया गया। इन दर्शनों के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु द्वारकाधीश मंदिर पहुंचे।