माता-पिता जैसे कर्म करेगें संतान वैसे ही संस्कार सिखेगी- स्वामी सत्यानंद महाराज

मेवाड़ किरण @ नीमच -

भगवान जितना दे उसी में खुष रहना चाहिये संस्कारों के अभाव में युवा पीढ़ी बुजूगों का आदर नहीं कर रही है क्योंकि माता-पिता जैसे कर्म बच्चों के सामने करते है बच्चें भी वैसा ही संस्कार सिखते है इसलिये माता-पिता को अच्छे संस्कार से जीवन यापन करना चाहिये। मानव निर्भिक होकर भक्ति में रहे तो उसका कल्याण हो सकता है जिसका सुख बड़ा होगा उसका दुख भी बड़ा होगा जिसका सुख छोटा तो दुख भी छोटा होगा जितना बड़ा पहाड़ होगा उतनी नीचे खाई भी होगी जिसका सम्मान ज्यादा होगा तो अपमान का दायरा भी उतना ही होगा। यह बात स्वामी सत्यानंद महाराज ने कही वे गणेष मंदिर, षीतलामाता मंदिर प्रांगण ग्वालटोली, बरूखेड़ा मार्ग मॉं अन्नपूर्णा श्रमजीवी हलवाई संघ द्वारा गणेष मंदिर की स्थापना वर्श के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में षुक्रवार को बोल रहे थे उन्होंनें कहां कि जिसके पास पाने को ज्यादा नहीं है उसके पास मिटाने को भी कम होता है मानव सुख दुख धीरे-धीरे ही सहन कर सकता है श्रीकृश्ण के जीवन में संघर्श भी बहुत ज्यादा आएं। मानव की कोई भी परिस्थिति हो तो वह समान स्थिति में धैर्यपूर्वक रहना सिखें। तभी उसका जीवन सार्थक हो सकता है उन्होंने कहा कि जिससे जीवन जीने की कला सीख ली, समझो उसके जीवन का बेडा पार हो गया। मनुश्य सही समय पर प्रभु भक्ति को धारण करे तभी जीवन का कल्याण हो सकता हे सुदामा गरीब थे दरिद्र नहीं।

Source : Apna Neemuch