मध्य प्रदेश सीमा से प्रतापगढ़ में घुसता स्क्रब टायफस का खतरा


गत एक माह में आठ और रोगी सामने आए
अधिकतर मरीज मंदसौर सीमा से सटे गांवों से
प्रतापगढ़
जिले में इस साल स्क्रब टायफस के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। जिले की एमपी सीमा से सटे गांवों में इसके रोगी की संख्या बढ़ती जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर इन इलाकों में स्वास्थ्य कर्मियों की भी कमी है। मौसम खुलने के साथ ही जिले में मौसमी बीमारियां बढऩे लगी है। जिले में हाल ही में स्क्रब टायफस और डेंगू के रोगी भी मिले है। इसमें स्क्रब टायफस के रोगी अधिक सामने आ रहे है। ये रोगी एमपी सीमा से सटे गांवों में अधिक है। यहां टीमें लगाकर सर्वे कराने पर यह बीमारी सामने आई है। जिले में स्क्रब टायफस के रोगी अगस्त माह तक कुल ९ सामने आए थे। इसके बाद सितंबर माह में इन रोगियों की संख्या बढक़र १७ हो गई है। एकाएक बढ़े रोगी के कारण चिकित्सा विभाग भी सावचेत हो गया है।
जिले में यह आंकड़ा
जिले में वर्ष २०१८ में मलेरिया के 167 रोगी सामने आए थे। वहीं इस वर्ष अब तक 107 रोगी सामने आए है। वहीं डेंगू के अब तक 3 रोगी सामने आ चुके है। इसी प्रकार स्क्रब टायफस के गत वर्ष २३ रोगी सामने आए थे। इस वर्ष १७ रोगी सामने आए है।
कुणी में नहीं चिकित्सक, भटक रहे मरीज
मोखमपुरा
निकटवर्ती कुणी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रामभरोस है। यहां कई माह से चिकित्सक तक नहीं है। इससे यहां नर्सिंगकर्मी के भरोसे चिकित्सालय संचालित किया जा रहा है। जबकि इसी क्षेत्र से इस वर्ष अब तक स्क्रब टायफस के कुल ७ रोगी मिले है। इस पर भी विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां गत तीन माह से से चिकित्सक नहीं है। ऐसे में मौसमी बीमारियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। यहां कई लोग को निकटवर्ती एमपी में उपचार के लिए जाते है। ग्रामीणों ने यहां चिकित्सक लगाने की मांग की है।

घर-घर सर्वे जारी, कर रहे उपचार
जिले में मौसमी बीमारियां बढ़ गई है। ऐसे में विभाग की ओर से घर-घर सर्वे किया जा रहा है। स्क्रब टायफस के रोगी एमपी सीमा से सटे गांवों में अधिक मिले है। ऐसे में यहां पर घर-घर सर्वे कराया जा रहा है। सभी को उपचार दिया जा रहा है। साथ मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए उचित सलाह भी दी जा रही है। वैसे गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष में कमी आई है।
डॉॅ. वीके जैन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, प्रतापगढ़

पिस्सू के काटने से फैलता है स्क्रब टायफस
स्क्रब टायफस रोग एक छोटे से जीव पीस्सू के काटने से फैलता है। पीस्सू के लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। इसकी वजह से लिवर, दिमाग व फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं और मरीज मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर के स्टेज में पहुंच जाता है।
इन्हें ज्यादा खतरा पहाड़ी इलाके, जंगल और खेतों के आस-पास रहता है। यहां पिस्सू ज्यादा पाए जाते हैं। लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधे या घने घास के पास इस पिस्सू के काटने का खतरा रहता है। पिस्सू के काटने के दो हफ्ते के अंदर मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। पिस्सू के काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखता है। इसका समय रहते इलाज नहीं हो तो रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है। कुछ मरीजों में लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाते जिससे वह बेहोशी की हालत में चला जाता है। रोग की गंभीरता के अनुरूप प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है।
यह करें उपचार के लिए
लक्षण व पिस्सू द्वारा काटने के निशान को देखकर रोग की पहचान होती है। ब्लड टेस्ट के जरिए सीबीसी काउंट व लिवर फंक्शनिंग टेस्ट करते हैं। एलाइजा टेस्ट व इम्युनोफ्लोरेसेंस टेस्ट से स्क्रब टाइफस एंटीबॉडीज का पता लगाते हैं। इसके लिए 7 से 14 दिनों तक दवाओं का कोर्स चलता है। हफ्ते में एक बार प्रिवेंटिव दवा भी देते हैं।