मधुर वाणी मिठी व कटु वाणी कड़वी होती है- प. पू. श्री प्रेमलता जी म. सा.

मेवाड़ किरण @ नीमच -

अपना कुकडेश्वर @ मनोज खाबिया
हमेशा जीवन में मधुर बोले व्यक्ति चला जाता है लेकिन वचनों की मार नहीं जाती मधुर वाणी मीठी होती है कटु वाणी कड़वी होती है चाकु का घाव भर जाता है लेकिन वचन का घाव नहीं भरता तलवार का घाव भर जाता है लेकिन जुबान का घाव नहीं भरता वचन पुण्य का उपार्जन करना है तो मधुर बोले मधुर व्यवहार करे व्यक्ति कड़वा बोल देता है बोलने बोलने में फर्क पड़ जाता है कोयल भी काली और कौआ भी काला दोनों मे वाणी का ही भेद है कोयल स्वर्ग में चली गई इंद्र को वश में कर लिया कोव्वे की आवाज प्रिय नहीं लगती है हम अपने आप का अवलोकन करे हम कैसा बोल रहे हैं मधुर या कड़वा अंदर बाहर एक जैसे होकर बोले अंदर पाप रखकर बाहर से मधुर बोलना भी श्रेष्ठ नहीं है हृदय सरल होना चाहिए चरित्र भाग में आनंद से न वचन के द्वारा पुण्य का उपार्जन करता है हम भी जीवन में वचन पुण्य का उपार्जन करे। उक्त विचार जैन धर्म शाला में शासन दिपीका प. पू. श्री प्रेमलता जी म. सा. ने धर्म सभा में कहे। इस अवसर पर श्री कल्पमणि जी म.सा. ने कहा कि हमारे भीतर क्रोध मान माया की ज्वाला धधक रही है प्रभु से प्रीत करेगे तो यह ज्वाला नष्ट होगी तेरे मेरे का भेद है वहाँ कषायों की ज्वाला है अपने मन का भाव जहाँ आता है वहाँ प्रेम के भाव उत्पन्न हो जाते हैं सज्जन व्यक्ति सज्जनता नहीं छोड़ा दुर्जन व्यक्ति दुर्जनता नहीं छोड़ता दुर्जन व्यक्ति दूसरों की खुशी देखकर मुरझा जाता है उसक हाथ कुछ आता नहीं सिर्फ हाथ मलते रह जाता है ईर्ष्या करने से कुछ नहीं होता भाग्य में होता है वह कोई छीन नहीं सकता दर्द है तो दवा है दर्द नहीं तो दवा का कोई ओचित्य नहीं गुणी गुण देखता है दुर्गुणी अवगुण ही देखता है धर्म सभा में कुशलराज खाबिया, सागरमल फांफरिया, सुरजमल बोहरा, सागरमल पटवा, सुधीर चंद्र पटवा, धीरज नाहटा, विजय जैन, तेजकरण सोनी, अशोक जोधावत, प्रकाश जैन, सुभाष जैन, देवचन्द गुर्जर, राम चन्द गंगवाल आदि उपस्थित थे। स्थानक वासी जैन श्री संघ के अध्यक्ष सुरजमल बोहरा ने अपने विचार व्यक्त किये। प्रभावना का लाभ राजेन्द्र जैन बोहरा परिवार द्वारा लिया गया। संचालन सतीश खाबिया ने किया उक्त जानकारी मनोज खाबिया ने प्रदान की।

Source : Apna Neemuch