भक्ति की तपस्या शक्ति से कष्ट दूर होते है – विनोद भय्या

मेवाड़ किरण @ नीमच -

भक्त द्वारा कलियुग में भगवान नाम का स्मरण करना ही मोक्ष का प्रथम द्वार है भगवान नरसी भक्त की तपस्या भक्ति से प्रसन्न होकर कश्ट दूर कर देते थे जो आज भी आर्दष है नानीबाई के विवाह में श्रीकृश्ण ने 56 करोड़ का मायरा भरकर आर्थिक संकट गरीबी में भी भक्त की प्रतिश्ठा बचाई और संसार को भक्ति के प्रति विष्वास की प्रेरणा दी थी जो आधुनिक युग में भी षिक्षाप्रद है आज भक्ति पीडि़त मानवता की सेवा में निहित है यह बात विनोद भय्या ने कही वे श्री सिद्धेष्वर महादेव मंदिर समिति स्कीम नं. 36 ए द्वारा भागवत प्रवक्ता साध्वी सुश्री जयमाला, नरेन्द्र षास्त्री, राजेन्द्र पुरोहित एवं पं. षिवषंकर त्रिपाठी के मार्गदर्षन में विनोद भय्या के श्रीमुख से 12 से 15 जनवरी तक चार दिवसीय संगीतमय नानीबाई का मायरा की ज्ञान गंगा के प्रथम दिवस षनिवार 12 जनवरी को दोपहर में बोल रहे थे उन्होने कहा कि भगवान षिव की भक्ति करने पर नरसी मेहता को वरदान में पांच वस्तुऐं प्रदान की गयी जिसमें तुलसी माला, करताल घुघरू, टोपी, केदारो राग प्रदान किये। जिसमें षिव द्वारा नरसी मेहता को गोलोकधाम के दर्षन भी करवाये जैसा विष्वास नरसी ने भगवान कृश्ण पर किया हम भी भागवान पर भक्ति कर विष्वास रखे तभी हमारे जीवन का कल्याण होगा। नरसी की पुत्री नानीबाई का मायरा के लिए उनके पास धन नहीं था नरसी भक्त का मायरा भगवान में स्वयं भरा था। नरसी भक्त की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी बेलगाड़ी भी टुटी फूटी थी, नरसी भक्त गरीब थे उनकी जगत हंसी करता था नानीबाई बिना मॉं की बेटी थी, संसार स्वार्थ से भरा है समय का चक्र सदैव चलता है पहले मायरा की परम्परा में तीन दिन तक महिलाएं गीत गाती थी नरसी की बेटी नानीबाई को सासु मॉं देरानी जेठानी ने ताने दिये थे। म्हारों सांवरियों आसी......सांवरिया के आगे खड़ा हूॅं कर जोड गाडी तो चलावे राजारण छोड घुणी बाबा के द्वारे रमा के जावेंगे.....मे तो अप ने कान्हा की मे तो बनी जागणिया...हंसी उडावे चाहे सारी दुनिया, कहॉं कहा की ठोकरा खाई भगवान तेरे वास्ते आदि भजन प्रस्तुत किए। महाराज श्री ने नरसी जन्म, नानीबाई की पत्रिका लिखने, नरसी का जीवन परिचय आदि विशयों का विस्तार से वर्तमान परिपेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया। महाआरती के प्रसाद वितरण किया गया।

Source : Apna Neemuch