बेटियों की चिन्ता, ‘इन मजनूओं का कुछ करो साहब’

 

डूंगरपुर. पुलिस महकमे के एक नवाचार ने अपराध और अपराधियों की तादाद को एकदम से कम कर दिया है। यही नहीं बालिकाओं को पढऩे का माहौल मिलने लगा है। वहीं, बालिकाओं और इनके अभिभावकों के बीच बिगड़ते तालमेल में भी पुलिस महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है। सबसे खास बचपन में मस्ती करने पर पुलिस पकड़ कर ले जाएगी जैसे संवादों ने पुलिस को देखते ही भय खड़ा कर दिया था वो भय दूर हो गया गया और डराने वाली पुलिस अब दोस्त बन गई है। इन सब के लिए पुलिस ने कुछ खास नहीं किया। एक माहौल बनाया और थाना क्षेत्र की सीनियर स्तर की बालिका स्कूलों और टीएडी हास्टलों में लेटर बॉक्स सरीखे डिब्बे लटकाएं और इन डिब्बों को नाम लिया ‘मन की बात’।
यूं शुरू हुई मन की बात
पिछले दिनों गामड़ी अहाड़ा की बालिका सीनियर विद्यालय में पुलिस अधीक्षक शंकरदत्त शर्मा के सानिध्य मेें वात्सल्य वार्ता हुई। इस दौरान बालिकाओं ने खुलकर संवाद किए। बातों-बातों में एक बालिका बोली, कि रोज इस तरह संवाद नहीं हो सकते क्या। इन शब्दों में बालिका के दर्द को एसपी के साथ थानाधिकारी रिजवान खान ने महसुस कर लिया। थाने में पहुंचने के बाद इस पर योजना बनी और तय किया गया कि बालिकाओं को स्वच्छ वातावरण मिलना चाहिए। यहीं मन की बात सबके साथ की योजना बनी। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर इस थाने को केस स्टडी के रूप में लिया और थाना क्षेत्र की आठ सीनियर स्तर की बालिका स्कूल और दो बालिका हॉस्टल में मन की बात पेटियां लगाई।
यह रीना मिस्त्री कौन है?
महिला थाने में कार्यरत थानाधिकारी रीना मिस्त्री से जुड़े सवाल भी बालिका ने मन की बात में पूछे। विकासनगर स्कूल की छात्रा ने पूछा कि यह रीना मिस्त्री मेम कहां की इंस्पेक्टर हैं।
यह कहां रहती हैं और कैसे काम करती हैं। इनको हमारे स्कूल भेज सकते हो क्या? पुलिस ने संस्थाप्रधान से कहा कि बालिकाओं की भावना पूरी की जाएगी।
हला दौर मजनूओं के नाम
मन की बात डब्बे पहली बार खुले तो ३६ शिकायतों में से अधिकांश शिकायत छेड़छाड के सामने आए। मन की बात में एक बालिका ने लिखा कि स्कूल आते-जाते वक्त बाइक पर लडक़े दौड़ते है और छूने का प्रयास करते हुए निकलते है। साहब इन मजनूओं से डर लगता है। पुलिस ने दूसरे दिन ही जाब्ता लगा दिया। आवारागर्दी पर लगा अंकुश।
सुविधाघर ठीक करा सकते हो?
विकासनगर स्कूल में विद्यालय के सुविधाघर की बदहाल स्थिति का जिक्र किया और कहा कि यहां जाने के नाम से चक्कर आते है। आप इसको ठीक करा सकते हो क्या। पुलिस ने विद्यालय प्रबन्धन समिति से सम्पर्क किया। सुधार के प्रयास शुरू हो गए है। वहीं गामड़ी अहाड़ा में बस स्टेण्ड पर सडक़ों के बीच ऑटो खड़े रहने की शिकायत की।
पापा से कहो, हेलमेट दिलाएं
जालुकुआ स्कूल की एक बालिका ने पत्र में लिखा कि पापा से कहो कि मुझे हेलमेट दिलाएं। पापा हेलमेट नहीं दिला रहे है। मुझे स्कूटी चलाते डर लगता है। इस पत्र के नीचे नाम नहीं लिखा था। इस पर पुलिस स्कूल पहुंची और संस्थाप्रधान से कहा कि जो बालिकाएं वाहन लेकर आ रही हैं, इनके अभिभावकों को बुलाएं और हेलमेट अनिवार्यता को बताएं।