बिजली पर प्रति यूनिट 1 से 2 रुपए अनुदान मिले तो उद्योग चले

भीलवाड़ा।
Textile industry bhilwara संकट के दौर से गुजर रहे टेक्सटाइल उद्योग को उबारने के लिए सरकार को सस्ती बिजली देनी होगी। बिजली की दरे अन्य राज्यों के मुकाबले राजस्थान में दो रुपए प्रति यूनिट ज्यादा है। एेसे में राजस्थान का टेक्सटाइल उद्योग अन्य राज्यों से मुकाबला नहीं कर पा रहा है।

Textile industry bhilwara वस्त्रनगरी के भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन से जुड़े उद्यमियों ने शुक्रवार को जयपुर में उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा व उद्योग आयुक्त केके पाठक के सामने यह समस्या रखी। उद्यमियों का कहना था कि डिस्कॉम बिजली दर एक रुपए प्रति यूनिट कम कर सकता है, लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। सरकार को एक से दो रुपए प्रति यूनिट अनुदान देना होगा। उद्योग मंत्री ने उद्यमियों को टेक्सटाइल क्षेत्र की समस्याएं जानने के लिए जयपुर बुलाया था।

Textile industry bhilwara फेडरेशन अध्यक्ष दामोदर अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के बाद टेक्सटाइल्स उद्योग में बदलाव आया। योजना से अत्याआधुनिक मशीनें लगी। आठ करोड़ मीटर सूटिंग्स के साथ 1.50 करोड़ मीटर डेनिम व कॉटन सूटिंग्स का उत्पादन हो रहा है। एक जुलाई को जीएसटी लागू होने के बाद रिफ्श में मिल रही वैट पर ६० प्रतिशत की छूट को सरकार ने बन्द कर दिया। ब्याज अनुदान का भुगतान नहीं होने से उद्योग आर्थिक कठिनाइयों के दोर से गुजर रहा है।

इन पर भी हुई चर्चा
उद्योगों ने ईटीपी, आरओ, एमईई लगा बड़ा निवेश किया है। इस पर कैपिटल अनुदान मिले। रिफ्श के तहत उद्यमी एक बैंक से दूसरे बैंक में ऋण फाइल स्थानान्तरित करता है, तो सरकार ब्याज अनुदान रोक देती है, जबकि केन्द्र सरकार की ए टफ में इस तरह का प्रावधान है। अनुदान भी केन्द्र सरकार राज्य को जारी करती है। बैठक में रीको के प्रबन्ध निदेशक गोरव गौयल के अलावा फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष रामेश्वर काबरा, पूर्व अध्यक्ष श्याम चांडक तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल शर्मा शामिल थे।