बिगड़ा मौसम: बारिश में बहा किसानों का पसीना


चित्तौडगढ़. रबी फसल तैयार होने के बाद उसे बेच अच्छी राशि पाने की किसानों की उम्मीदों पर सोमवार शाम से शुरू हुई बारिश ने पानी फेर दिया। चित्तौड़ शहर सहित जिले में कई स्थानों पर शाम ६ बजे बाद बारिश का दौर शुरू हो गया। आसमान में गरजती-कड़कती बिजलियों के साथ मेघ बरसना शुरू हुए तो अन्नदाताओं की अच्छी फसल की उम्मीदे भी धुलने लगी। खेतों में इस समय गेहूूं व अन्य फसल कटाई का दौर चलने से खेत-खलिहान में अनाज के ढेर लगे हुए है। बारिश से ऐसा अनाज भीग गया। बारिश के कारण चित्तौडग़ढ़ कृषि मण्डी में खुले में रखी गेहूं की बोरिया व अन्य अनाज भी भी गया। मण्डी में पानी भरने से व्यापारियों की दुकानों के बाहर रखा अनाज भी गया। बारिश का असर शहर में भी दिखा एवं शाम को कार्यालयों से छुट्टी होने के समय बारिश आ जाने से लोगों को घर पहुंचने में परेशानी हुई। शाम ६ बजे के आसपास सब्जी मण्डी व मुख्य बाजारों ूमें भी खरीदारों के लिए लोगों की भीड़ थी। अचानक बारिश आ जाने से बाजार में निकले लोगों में अफरातरफरी मच गई व लोग सुरक्षित स्थानों पर खड़े रहकर बारिश कम होने या बंद होने का इन्तजार करते रहे। रात में भी रूक-रूक कर बारिश का दौर चलता रहा। इससे पूर्व चित्तौडग़ढ़ शहर में दोपहर एक बजे बाद मौसम बदला व आसमान में काले बादल छा गए। धूलभरी हवाएं चलने से राहगीर व दुपहिया वाहन चालक परेशान रहे।

विवाह आयोजनों में हुआ व्यवधान
अचानक आई बारिश से किसानों के साथ विवाह आयोजक भी भारी परेशान हुए। कई जगह खुली वाटिकाओं में शाम को प्रीतिभोज की तैयारियां थी। आंधी व बारिश के कारण आयोजकों को आनन-फानन में वाटिकाएं छोड़ बंद हॉल में भोजन के प्रबन्ध करने पड़े। विवाह समारोह में आने-जाने वाले लोगों को भी बारिश के कारण परेशानी आई।
बारिश में बिजली बनी बैरन
बारिश शुरू होते ही कई क्षेत्रों में बिजली गुल होने से भी लोग परेशान रहे। बारिश के कारण उमस का माहौल बन गया और उसमें बिजली बंद रहने से लोग पसीने से भी भीग गए। चित्तौड़ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भी रात में बिजली आपूर्ति बार-बार बाधित होती रही।

भीग गया मण्डी में रखा अनाज
चित्तौड़ कृषि मण्डी में इन दिनों गेहूं आदि बड़ी मात्रा में नीलामी के लिए पहुंच रहा है। मण्डी में खुले में रखी गेहूं से भरी बोरिया पानी में भीग गई। इससे गेहूं खराब होने के साथ आर्थिक नुकसान भी हुआ। मण्डी में कई जगह बारिश का पानी भरने से भारी परेशानी आई। अनाज को भीगने से बचाने के लिए व्यापारी दौड़धूप करते रहे।